-गयाजी से अमरेंद्र कुमार दिव्य दिनकर के लिए
गयाजी। गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेला केवल देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था और आध्यात्मिक साधना का केंद्र बनता जा रहा है। शुक्रवार को रूस, जर्मनी,इटली,यूक्रेन, घाना और लातविया समेत विभिन्न देशों से पहुंचे 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने देवघाट पर सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान और तर्पण किया।
अंतरराष्ट्रीय सनातन धर्म प्रचारक लोकनाथ गौड़ के नेतृत्व में पहुंचे विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने दिवंगत पूर्वजों, परिजनों और मित्रों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना करते हुए भारतीय वैदिक विधि-विधान से पिंडदान किया। सभी श्रद्धालु भारतीय वेशभूषा में नजर आए। उन्होंने निर्जला उपवास रखकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तिल,जौ और जल से अपने पितरों का तर्पण किया। जर्मनी की स्वेतलाना ने बताया कि वह इससे पहले भी गया आ चुकी हैं। गया की आध्यात्मिक ऊर्जा और पितृपक्ष की धार्मिक परंपराएं उन्हें लगातार आकर्षित करती हैं। उनका कहना था कि यहां पिंडदान और तर्पण की परंपरा से जुड़ना उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव है। लोकनाथ गौड़ के अनुसार,इस वर्ष अब तक 50 से अधिक विदेशी श्रद्धालुओं के गया पहुंचने की पुष्टि हुई है। विभिन्न देशों से श्रद्धालुओं का गया पहुंचना यह दर्शाता है कि पितृपक्ष के दौरान विष्णुपद और फल्गु तट पर होने वाली पिंडदान की सनातन परंपरा की पहुंच देश की सीमाओं से बाहर तक है। विदेशी श्रद्धालुओं की श्रद्धा और भारतीय परंपराओं के प्रति उनकी आस्था ने गयाजी के पितृपक्ष मेले के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व को एक बार फिर सामने ला दिया।
