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मुंगेर में राजद के चार ‘रत्न’ और एक ‘छपास’ रोग, कोसी चुनाव में ‘कुर्सी’ से ज्यादा चर्चा की ‘चिंता’

मुंगेर में राजद के चार ‘रत्न’ और एक ‘छपास’ रोग, कोसी चुनाव में ‘कुर्सी’ से ज्यादा चर्चा की ‘चिंता’

-खबर नहीं छपने से बेचैन हैं लंबे-चौड़े नाम वाले नेता जी
-मीडिया मैनेजमेंट के दो ‘विशेषज्ञ’ नियुक्त
रंजीत विद्यार्थी
मुंगेर :
कहते हैं कि सत्ता नहीं तो संगठन ही सही, लेकिन मुंगेर राजद में इन दिनों संगठन से ज्यादा विखंडन की चर्चा है। अंदरखाने की मानें तो जिला राजद एक नहीं, पूरे चार गुटों में बंटा हुआ है। हर गुट के अपने अध्यक्ष, अपने प्रवक्ता और अपना व्हाट्सएप ग्रुप है। एकता की बात बैठक में होती है और बैठक के बाद चारों गुट अपने-अपने चाय दुकान पर एकता की व्याख्या करते हैं।
इन दिनों जिले के कई बड़े-छोटे नेता एक नई बीमारी से ग्रसित बताए जा रहे हैं, जिसका नाम कार्यकर्ता प्यार से ‘छपास रोग’ कहते हैं। इस रोग का लक्षण है – सुबह अखबार में अपना फोटो न दिखे तो दिन भर बेचैनी, ब्लड प्रेशर हाई और जुबान पर एक ही सवाल – “आज मेरा फोटो छपा कि नहीं?” जनता के बीच काम दिखे या न दिखे, अखबार में चेहरा दिखना जरूरी है।

कोसी MLC चुनाव और दो मैनेजरों की नियुक्ति
चर्चा है कि आगामी कोसी निर्वाचन क्षेत्र के स्नातक चुनाव को लेकर पार्टी ने मीडिया को ‘मैनेज’ करने का जिम्मा दो नेताओं को दिया है। मैनेज का अर्थ यहां प्रेस विज्ञप्ति भेजना नहीं, बल्कि यह तय करना बताया जा रहा है कि किस गुट की खबर पहले छपे और किसकी दबे।
सूत्रों के अनुसार इन दोनों नेताओं की सबसे बड़ी योग्यता संगठन चलाना नहीं, बल्कि पत्रकारों के नंबर सेव होना और “भैया, मेरा वाला थोड़ा बड़ा लगवा दीजिए” कहना है। इसी कवायद के बीच एक लंबे-चौड़े नाम वाले नेता जी की बेचैनी बढ़ी हुई है। नाम इतना लंबा कि बैनर पर पूरा लिखो तो फोटो के लिए जगह कम पड़ जाए। पिछले कुछ दिनों से उनकी कोई बड़ी खबर नहीं छपी, तो वे हर जगह पूछते फिर रहे हैं – “क्या मीडिया ने हमें भुला दिया?” कार्यकर्ता भी अब कहने लगे हैं, नेता जी को कुर्सी से ज्यादा चिंता कवरेज की है।

चार गुट, चार दरबार, एक ही राग
मुंगेर राजद का पहला गुट सदर व नगर का, दूसरा धरहरा व बरियारपुर का, तीसरा जमालपुर का और चौथा ‘सर्वगुट’ है जो हर गुट में थोड़ा-थोड़ा रहता है। हर गुट का दावा है कि असली राजद वही है। कार्यकर्ता असमंजस में है कि झंडा किसके दरवाजे पर लगाए।
व्यंग्य यह है कि जनता के बीच जाने से पहले नेता जी अपनी प्रेस कटिंग जनता के बीच ले जाते हैं। योजना क्या है, मुद्दा क्या है, बूथ कैसे मजबूत होगा, इस पर कम चर्चा होती है, फोटो किस एंगल से आई है, हेडिंग में नाम ऊपर था या नीचे, इस पर ज्यादा मंथन होता है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब तक ‘छपास’ से ‘विश्वास’ तक का सफर तय नहीं होगा, तब तक चार गुटों का यह गठबंधन कागजों और फेसबुक लाइव तक ही सीमित रहेगा। फिलहाल मुंगेर राजद में कुर्सी की लड़ाई से बड़ी लड़ाई, अखबार में जगह की लड़ाई बन गई है।

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