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पलामू के लकड़ाही में फर्जी ग्रामसभा कर खनन लीज देने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

पलामू के लकड़ाही में फर्जी ग्रामसभा कर खनन लीज देने का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

पंचायत समिति सदस्यों ने छतरपुर एसडीओ को सौंपा आवेदन, देवस्थान और ग्रामीण सड़क की जमीन पर खनन लीज का भी उठाया मामला

पलामू। झारखंड के पलामू जिले के नौडीहा बाजार प्रखंड अंतर्गत खैरादोहर पंचायत के ग्राम लकड़ाही में कथित तौर पर फर्जी ग्रामसभा कर खनन लीज देने का मामला सामने आया है। पंचायत समिति सदस्य संतोष यादव और बलवंती देवी ने बुधवार को छतरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने स्टोन किंग एंड माइनिंग इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड पर नियमों की अनदेखी कर खनन लीज लेने का आरोप लगाया है।

ग्रामसभा में फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप

पंचायत समिति सदस्यों का आरोप है कि लकड़ाही गांव में प्रस्तावित खनन लीज के लिए आयोजित ग्रामसभा की जानकारी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को नहीं थी। संतोष यादव के अनुसार, गांव की आबादी एक हजार से अधिक है, लेकिन अधिकांश ग्रामीणों को ग्रामसभा के आयोजन के बारे में जानकारी नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा के दस्तावेजों में ग्रामीणों के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं और अंगूठे के निशान का भी इस्तेमाल किया गया है। पंचायत समिति सदस्यों ने संबंधित दस्तावेजों में दर्ज हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशानों का मिलान कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

देवस्थान और ग्रामीण सड़क की जमीन पर खनन लीज का मामला

पंचायत समिति सदस्यों ने आवेदन में खाता संख्या 11 और प्लॉट संख्या 248 एवं 394 की कुल 4.43 एकड़ प्रस्तावित भूमि का उल्लेख किया है। उनका दावा है कि इस जमीन पर गोसाई टोंगरा बाबा का देवस्थान स्थित है, जहां ग्रामीण लंबे समय से पूजा-पाठ करते आ रहे हैं। इसके अलावा, उक्त भूमि से ग्रामीण सड़क भी जुड़ी हुई है।

उनका आरोप है कि देवस्थान और ग्रामीण सड़क से संबंधित पहलुओं को नजरअंदाज करते हुए कर्मचारी और अंचल अमीन की रिपोर्ट के आधार पर खनन लीज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि, भूमि की स्थिति, लीज की स्वीकृति और संबंधित रिपोर्टों की वास्तविकता की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से होनी बाकी है।

मुखिया और पंचायत सेवक की भूमिका पर भी सवाल

पंचायत समिति सदस्यों ने ग्रामसभा के आयोजन में मुखिया और पंचायत सेवक की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को जानकारी दिए बिना गोपनीय तरीके से ग्रामसभा कराई गई।

उन्होंने एसडीओ से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ग्रामसभा से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

मामले में अब प्रशासन की जांच और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन पर नजर रहेगी। ग्रामसभा की सूचना, उपस्थिति रजिस्टर, हस्ताक्षर एवं अंगूठे के निशान, भूमि अभिलेख और खनन लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच से आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, पंचायत समिति सदस्यों की ओर से लगाए गए आरोपों पर अनुमंडल प्रशासन और संबंधित कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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