
चतरा। झारखंड के चतरा सदर अस्पताल में मंगलवार को ममता देवी ने पुरुष के शव का पोस्टमार्टम करने में चिकित्सकों की सहायता कर साहस और कार्यकुशलता का परिचय दिया। निजी अस्पतालों में करीब 15 वर्षों तक नर्स के रूप में काम कर चुकीं ममता ने पहली बार पोस्टमार्टम की जिम्मेदारी संभाली। बताया गया कि उन्होंने एक के बाद एक दो शवों के पोस्टमार्टम में सहयोग किया।
ममता देवी शहर के बिंड मोहल्ले की रहने वाली हैं और दीपू सिंह की पत्नी हैं। उनका पहला पोस्टमार्टम दुर्घटना में मृत राजेश शर्मा के शव का था। इसके करीब एक घंटे बाद लावालौंग से एक अन्य शव सदर अस्पताल लाया गया। ममता ने उसके पोस्टमार्टम में भी सहयोग किया।
पोस्टमार्टम कर्मी के इनकार के बाद सामने आईं ममता
जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम का काम करने वाले नियमित कर्मी सुखदेव राम पर एक दिन पहले शवों का पोस्टमार्टम करने के एवज में 5,000 रुपये मांगने का आरोप लगा था। अस्पताल प्रबंधन ने आरोप के बाद उन्हें काम करने से रोक दिया था। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अगले दिन राजेश शर्मा का शव पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचा। बताया जाता है कि जिले में पोस्टमार्टम का काम करने वाले नियमित कर्मी के इनकार के कारण प्रक्रिया में परेशानी आ रही थी। अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनसे पोस्टमार्टम करने का अनुरोध किया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।

जरूरत के समय ममता ने संभाली जिम्मेदारी
ममता देवी ने कुछ दिन पहले ही सिविल सर्जन को आवेदन देकर काम की जरूरत बताई थी। आवेदन में उन्होंने करीब 15 वर्षों तक निजी अस्पतालों में नर्स के रूप में काम करने का अनुभव साझा किया था और पोस्टमार्टम का काम करने की इच्छा जताई थी।
अस्पताल में जरूरत पड़ने पर सिविल सर्जन ने ममता को फोन कर स्थिति की जानकारी दी। ममता तैयार हो गईं और करीब 10 मिनट के भीतर पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गईं। वहां अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार और डॉ. अजहर की मौजूदगी में उन्होंने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में सहयोग किया।
उपाधीक्षक ने की ममता की सराहना
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार ने ममता देवी के काम की सराहना की। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के साथ काम करना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन ममता ने पहली बार में ही चिकित्सकों के निर्देशानुसार काम कुशलता से किया।
उपाधीक्षक के मुताबिक, ममता देवी को एक-दो दिनों के भीतर आउटसोर्सिंग के माध्यम से पोस्टमार्टम कर्मी के रूप में बहाल करने की प्रक्रिया की जा रही थी।
ममता देवी की पहल ने अस्पताल में जरूरी सेवा जारी रखने में मदद की। साथ ही, यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता और वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत को भी सामने लाती है।
