जिला ब्यूरो शहडोल
खन्नौधी। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, बेघर एवं कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। शासन द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों के अनुसार जिन लोगों के पास पहले से पक्का मकान, दो मंजिला या बहुमंजिला भवन, अथवा अन्य अपात्रता की श्रेणी में आने वाली सुविधाएं हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलना चाहिए। यह योजना केवल वास्तविक जरूरतमंद एवं पात्र परिवारों के लिए बनाई गई है।
लेकिन ग्राम पंचायत खन्नौधी में इसी योजना को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची तैयार करने में भारी अनियमितताएं की गई हैं। आरोप है कि कई ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए जिनके पास पहले से पक्के मकान, दो मंजिला या बहुमंजिला भवन, चार पहिया वाहन अथवा आर्थिक रूप से संपन्न परिवार हैं। वहीं कई वास्तविक गरीब और पात्र परिवार आज भी योजना के लाभ से वंचित बताए जा रहे हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ लाभार्थियों के परिवार सरकारी सेवा से जुड़े हैं या आर्थिक रूप से सक्षम हैं, फिर भी उन्हें योजना का लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया है। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह योजना के मूल उद्देश्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे गंभीर आरोप यह भी लगाया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम जोड़ने के नाम पर कुछ लोगों से ₹5,000 से ₹10,000 तक की राशि वसूली गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह गरीबों के अधिकारों और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा।
शिकायत में मांग की गई है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी पात्रता सूची, चयन प्रक्रिया तथा ग्राम पंचायत स्तर पर योजना के क्रियान्वयन में जुड़े संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि लाभार्थियों का चयन शासन के नियमों के अनुरूप हुआ या नहीं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन गरीब परिवारों के लिए यह योजना बनाई गई थी, वे आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं, जबकि शिकायतों के अनुसार कई कथित अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिल गया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप असत्य पाए जाते हैं तो जांच से वह भी स्पष्ट हो जाएगा। फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
अगले अंक में होगा बड़ा खुलासा…
शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर अगले अंक में उन कथित अपात्र लाभार्थियों की सूची प्रकाशित की जाएगी, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नियमों के विपरीत दिया गया। साथ ही, शिकायत में जिन लोगों पर ₹5,000 से ₹10,000 तक की राशि लेकर नाम जोड़ने के आरोप लगाए गए हैं, उनसे संबंधित उपलब्ध तथ्यों एवं दस्तावेज़ों को भी क्रमवार सामने लाया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, शिकायत में जिन संबंधित पंचायत स्तर के कर्मचारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उससे जुड़े तथ्यों और दस्तावेज़ों को भी प्रकाशित किया जाएगा।
बने रहिए हमारे साथ… क्योंकि अगला अंक शिकायत, दस्तावेज़ों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस पूरे मामले से जुड़े एक और बड़े खुलासे के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
