-सरकारी वादों से थके ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान,पुल बनाना किया शुरू
-अब खुली प्रशासन की नींद
रंजीत विद्यार्थी
मुंगेर : मुंगेर प्रमंडल अंतर्गत जमुई जिले के खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत के जतहर और कैरवातरी गांव के ग्रामीण आज भी एक अदद पुल का इंतजार कर रहे हैं। करीब 150 मीटर चौड़ी नदी बरसात के दिनों में दोनों गांवों का संपर्क मुख्य इलाके से काट देती है। वर्षों तक सरकारी आश्वासन मिलने के बाद अब ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर बांस-बल्ले के सहारे अस्थायी पुल बनाने की कमान संभाल ली है।
हाल यह है कि स्कूल जाने के लिए पहले कहावत कही जाती थी कि हम तो नदी पार करके जाते थे। वो कहावत आजादी के 79 साल बाद भी उतनी ही सच्ची है। गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए कमर भर पानी में नदी पार करनी होती है। पीठ पर बस्ता भी लिए रहना पड़ता है। जरा सा कदम इधर उधर हुए तो जान के साथ किताबों पर भी खतरा आ जाएगा। लेकिन मजबूरी है कि जाना इसी पानी को पार करके है।
इन गांवों की आबादी करीब 250 से 300 है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को होती है। बच्चों को नदी पार कर अरुणमबांक यानी सोखो जाना पड़ता है। वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को खटोली पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है।
ग्रामीणों के अनुसार पुल निर्माण की मांग को लेकर विधायक, सांसद और मंत्री से कई बार गुहार लगाई गई। स्थानीय विधायक की ओर से डीपीआर तैयार होने और जल्द निर्माण शुरू होने का आश्वासन भी मिला, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। सरकारी वादों से निराश ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर अस्थायी पुल बनाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें स्थायी पुल चाहिए, ताकि बरसात में गांव का संपर्क न टूटे। अब जबकि गांव वालों ने खुद पुल बनाने का बीड़ा उठाया तो प्रशासन तक भी मामले की गंभीरता पहुंच गई। इसके बाद जमुई के डीएम नवीन ने ग्रामीणों को बुलाया है। अब देखना होगा कि वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है। या फिर गांव वाले अपने दम पर ही पुल खड़ा कर सरकार को बड़ा सबक दे देते हैं?
जतहर और कैरवातरी गांव के लोगों को आजादी के 80 साल बाद भी पुल बनने का इंतजार
