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पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, बाल-बाल बचे; जर्जर सुरक्षा वाहनों पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के काफिले की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, बाल-बाल बचे; जर्जर सुरक्षा वाहनों पर उठाए सवाल

चौका के पास NH-33 पर हुआ हादसा, पूर्व सीएम और सभी सुरक्षाकर्मी सुरक्षित; छह बार पत्राचार के बावजूद नहीं बदली वाहनों की स्थिति
रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा के सुरक्षा काफिले में शामिल एक वाहन शुक्रवार को सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। हादसा खूंटी से जमशेदपुर जाने के दौरान एनएच-33 पर सरायकेला-खरसावां जिले के चौका के समीप हुआ। राहत की बात यह रही कि दुर्घटना में अर्जुन मुंडा और उनके साथ चल रहे सुरक्षाकर्मी पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी को गंभीर चोट नहीं आई।

घटना के बाद अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी दी। उन्होंने ईश्वर का आभार जताते हुए कहा कि दुर्घटना में उन्हें और उनकी सुरक्षा में तैनात किसी भी जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

सुरक्षा वाहनों की बदहाली पर उठाए सवाल

हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा काफिले में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की हालत बेहद खराब है। यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि दिन-रात ड्यूटी करने वाले सुरक्षाकर्मियों के जीवन से भी जुड़ा गंभीर विषय है।

अर्जुन मुंडा के मुताबिक, उनके कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र लिखकर वाहनों की जर्जर स्थिति, बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों और सुरक्षा पर पड़ रहे इसके प्रभाव से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।

छह बार पत्र लिखने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

अर्जुन मुंडा ने बताया कि उनके कार्यालय की ओर से 28 जुलाई 2024, 22 अगस्त 2024, 19 अप्रैल 2025, 11 सितंबर 2025, 9 मार्च 2026 और 29 जून 2026 को संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजे गए थे।

इसके अलावा गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने भी 14 मार्च 2026 को पत्रांक 08/सुरक्षा(II)-01/2025, ज्ञापांक 1645 के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र जारी किया था। इसके बावजूद वाहनों की स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि जर्जर वाहनों की केवल सामान्य मरम्मत कर उन्हें दोबारा ड्यूटी में लगा दिया जाता है। कुछ ही दिनों बाद उनमें फिर तकनीकी खराबियां आने लगती हैं। विभाग की ओर से सुरक्षा वाहनों की समुचित समीक्षा भी नहीं की गई है।

सायरन और झंडे नहीं होने से भी सुरक्षा पर खतरा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा काफिले में अत्यंत पुराने और जर्जर वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई वाहनों पर सायरन और झंडे जैसी पहचान की व्यवस्था भी नहीं है। इसके कारण दूसरे वाहन चालकों को काफिले की पहचान नहीं हो पाती और कई बार बाहरी गाड़ियां काफिले के बीच में घुस जाती हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना या जनहानि के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? अर्जुन मुंडा ने सरकार से तत्काल संज्ञान लेकर सुरक्षा काफिले में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित और तकनीकी रूप से दुरुस्त वाहन उपलब्ध कराने की मांग की है।

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