गुमला। आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत के बाद गुमला समेत पूरे आदिवासी समाज में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में शनिवार, 7 नवंबर को गुमला बंद का आह्वान किया गया है। कहतो मूली पड़हा, गुमला की ओर से महेंद्र उरांव ने बंद की घोषणा करते हुए लोगों से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने की अपील की है।
निशा भगत की मौत से उनके समर्थकों और आदिवासी संगठनों में गहरा आक्रोश है। समाज के लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बंद के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शनिवार को ही चैनपुर में निशा भगत का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मौत से पहले फेसबुक लाइव पर लगाए थे गंभीर आरोप
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को निशा भगत ने आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले वह सोशल मीडिया पर करीब 11 मिनट तक लाइव आई थीं। लाइव के दौरान उन्होंने जमीन के दलालों और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने अपनी मौत के लिए कथित तौर पर जमीन विवाद से जुड़े लोगों और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया था।
उनके लाइव वीडियो सामने आने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब आदिवासी संगठनों और समर्थकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
रिम्स में हुआ पोस्टमार्टम, जांच में जुटी पुलिस
घटना के बाद निशा भगत के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स लाया गया था। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी कराई गई। पुलिस और एफएसएल की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए हैं। वहीं, निशा के पिता ने भी उनके फेसबुक लाइव में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ मामला दर्ज कराने की बात कही है।
जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर सक्रिय थीं निशा भगत
निशा भगत आदिवासी समाज के हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन, सरना संस्कृति और आदिवासी अस्मिता से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहती थीं। वह सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय थीं। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उनके निधन से गुमला के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
बंद से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका
निशा भगत की मौत के विरोध में बुलाए गए बंद के कारण गुमला के बाजार, दुकानें और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अब सभी की निगाहें अंतिम संस्कार और बंद के दौरान होने वाले विरोध प्रदर्शन पर टिकी हैं। आदिवासी समाज की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोपों की सच्चाई सामने आए और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
