-गयाजी से अमरेंद्र कुमार
गयाजी में सनातन परंपरा के प्रति विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था, रबर डैम के समीप विधि-विधान से संपन्न हुआ पितृ कर्म
गयाजी। पितरों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना लेकर रूस से 25 विदेशी श्रद्धालु सोमवार को गयाजी पहुंचे। यहां उन्होंने फल्गु नदी के तट पर रबर डैम के समीप विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया। इस दौरान विदेशी श्रद्धालुओं ने भारतीय सनातन परंपरा के अनुरूप अपने पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित की। धार्मिक अनुष्ठान इस्कॉन मंदिर के संयोजक एवं पंडा अरविंद कटियार के निर्देशन में संपन्न कराया गया। उन्होंने विदेशी श्रद्धालुओं को पिंडदान और तर्पण की धार्मिक मान्यताओं एवं महत्व की जानकारी दी। फल्गु नदी के तट पर जब रूसी श्रद्धालु पितृ कर्म में शामिल हुए,तो आसपास मौजूद लोगों की नजरें भी उनकी ओर आकर्षित हुईं। भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था और सहभागिता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। गयाजी को सनातन धर्म में पिंडदान और पितरों के तर्पण के लिए विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। मान्यता है कि यहां विधि-विधान से पिंडदान करने पर पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के कारण देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पितृ कर्म करने गयाजी पहुंचते हैं। रूस से आए 25 श्रद्धालुओं का फल्गु तट पर पिंडदान करना इस बात को रेखांकित करता है कि गयाजी की धार्मिक परंपराएं और आध्यात्मिक पहचान देश की सीमाओं से परे भी लोगों को आकर्षित करती हैं।
रूस से गयाजी पहुंचे 25 श्रद्धालु, फल्गु तट पर किया पिंडदान; पितरों की शांति के लिए की प्रार्थना
