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सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाना मनमाना नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को ठहराया सही

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाना मनमाना नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को ठहराया सही

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा उठाए जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य और डिवीजन बेंच के पुराने आदेशों के मद्देनजर उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार और पुलिस के इस कदम को किसी भी तरह से मनमाना या अवैध नहीं कहा जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को केवल वही दवाएं दी जा रही हैं, जिनके लिए उन्होंने अपनी लिखित रजामंदी दी है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

पत्नी ने की प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग
यह पूरी सुनवाई सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि द्वारा दायर याचिका पर हुई। याचिका में मांग की गई थी कि वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से हटाकर किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाए, ताकि उनकी बेहतर देखभाल हो सके। कोर्ट अब इस पहलू पर 24 जुलाई 2026 को अगली सुनवाई करेगा। गौरतलब है कि सफदरजंग अस्पताल के भीतर भी वांगचुक की भूख हड़ताल लगातार जारी है। वह और सीजेपी (CJP) के सदस्य बीते 28 जून से NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं।

देर रात 1:30 बजे बनी थी रणनीति, बिना टकराव के ऐसे किया रेस्क्यू
सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाने की कार्रवाई बेहद गोपनीय और सुनियोजित थी। दिल्ली पुलिस के नए आयुक्त अनुराग कुमार के पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार देर रात 1:30 बजे गृह मंत्रालय से इसके निर्देश मिले थे। इसके तुरंत बाद नई दिल्ली जिले के आला अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में आपात बैठक की।

पुलिस ने एक मिनट के भीतर बिना किसी टकराव के वांगचुक को एम्बुलेंस तक ले जाने का मॉक ड्रिल (रिहर्सल) किया। मौके पर मोबाइल जैमर लगाने पर भी विचार हुआ ताकि कार्रवाई का कोई वीडियो लाइव न हो सके। शनिवार सुबह 5 बजे पुलिस जंतर-मंतर पहुंची और सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने चारों तरफ सफेद चादरें तान दीं, ताकि वीडियोग्राफी न हो सके और बेहद शांतिपूर्ण तरीके से वांगचुक को अस्पताल पहुंचा दिया गया।

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