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गैस सिलेंडर की गाड़ी लगते ही गैस गोदाम पर टूट पड़ते है लोग

गैस सिलेंडर की गाड़ी लगते ही गैस गोदाम पर टूट पड़ते है लोग

लखीसराय/ कजरा

डॉ आर लाल गुप्ता

बेशक हम भारत बासी आजादी के 78 वा बरस बिता रहे हैं परंतु अभी तक कई ऐसे क्षेत्र है जिसमें आत्मनिर्भरता कोसों दूर है। रसोई गैस भी इन्ही आत्मनिर्भरता की कमी को दर्शाता है।
इंसान को जीने के लिए मूलभूत सुविधाएं खाना कपड़ा और मकान है बाद शिक्षा और चिकित्सा आता है।
अब खाना को पकाने के लिए आग की आवश्यकता तो होती ही होती है।अगर रसोई गैस का विकल्प की बात करें तो बिजली का चूल्हा या लकड़ी उपला को जलावन के रुप में प्रयोग। परंतु माकूल बिजली रहती नहीं और जलावन के धुएं से सांस एवं आंख की बीमारी अवश्यसंभावी है। ऐसे में ज्यादा हिफाजत रसोई गैस ही हो जाती है।
जिसपर हमारा देश आत्मनिर्भर नहीं हो सका।
आने वाले समय में इस मामले में सरकार की नीति क्या हो सकती है फिलवक्त यह कहना असंभव जान पड़ता है, और यही कारण है कि गैस सिलेंडर के लिए गैस गोदाम पर लम्बी कतार देखी जा रही है। विशेष कर जिनके घर में शादी अथवा श्राद्ध का आयोजन होने बाला है उनके लिए तो विशेष परेशानी का सबब है।

शादी या श्राद्ध के लिए अंचल की मदद से मिल सकती है सिलेंडर

जिनके घर में शादी अथवा श्राद्ध है उन्हें आसानी से गैस डीलर के पास से गैस सिलेंडर मिल सकता है।
जानकारी होगी ऐसे अवसर पर ब्लॉक में जाकर अपना आधार कार्ड और शादी अथवा श्रद्धा का कार्ड ले जाकर आवेदन देने से प्रखंड विकास पदाधिकारी उन्हें कमर्शियल सिलेंडर आवश्यकता अनुसार देने के अनुशंसा कर सकते हैं उनके द्वारा दी गई आवेदन पर अनुशंसा की जाएगी और गैस गोदाम के डीलर को दिखाने पर जरूरतमंद लोगों को गैस सिलेंडर मुहैया कराई जाएगी। यह दीगर बात है की हर लोग ब्लॉक के चक्कर काटने के चक्कर से बचना चाहते हैं जबकि सरकार इतनी सुविधा मुहैया कर दी है।
कुछ उपाय कर गैस की किल्लत से बचा जा सकता है
महावीर डेंटल केयर के चिकित्सक डॉ मानस निखार को मानें तो उनके अनुसार सुबह में रोटी के बजाय मौसमी फल व सत्तू का नाश्ते में शामिल कर कुछ हद तक गैस की खपत से बचा जा सकता हैं। विशेषकर उन परिवारों के लिए यह उपाय ज्यादा उत्तम माना जा सकता है जो संयुक्त परिवार में रहते हैं। फिलवक्त गैस तो किसी तरह मिल जा रही है परंतु ससमय नहीं या धड़ले से नहीं यही कारण है कि गैस सिलेंडर के लिए लोगों को लम्बी कतार लग रही है।

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