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मुंगेर में कचरे से निकलेगा धन! चुरंबा डंपिंग यार्ड में 11 करोड़ की लागत से लग रहा आधुनिक एमआरएफ प्लांट

मुंगेर में कचरे से निकलेगा धन! चुरंबा डंपिंग यार्ड में 11 करोड़ की लागत से लग रहा आधुनिक एमआरएफ प्लांट

-मुंगेर नगर निगम की कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी पहल
-8.70 करोड़ रुपये की लागत से एमआरएफ प्लांट और 2.60 करोड़ रुपये से कंपोस्ट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू
-कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ निगम को अतिरिक्त आय भी होगी
-गीले कचरे से तैयार होगी जैविक खाद
-रंजीत विद्यार्थी
मुंगेर:
मुंगेर नगर निगम क्षेत्र में रोजाना पैदा होने वाले कचरे की समस्या का जल्द ही स्थायी समाधान होने जा रहा है। शहर के सभी 45 वार्डों से निकलने वाले कचरे के प्रसंस्करण के लिए चुरंबा डंपिंग यार्ड में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और कंपोस्ट प्लांट का निर्माण कार्य तेजी से जारी है। इस परियोजना के चालू होने से न केवल डंपिंग यार्ड में कचरे के ढेरों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि कचरे के पुनर्चक्रण और जैविक खाद बनाकर नगर निगम धन भी अर्जित कर सकेगा। ये पूरी व्यवस्था शहर के पर्यावरण और स्वच्छता के लिहाज से एक बड़ा बदलाव साबित होगी।

8.70 करोड़ की लागत से बनेगा एमआरएफ प्लांट
चुरंबा डंपिंग यार्ड में करीब 8.70 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस आधुनिक प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 50 टन कचरे को प्रोसेस करने की होगी। शहर के सभी वार्डों से एकत्र कचरा सीधे इस यार्ड में लाया जाएगा, जिससे कचरा निस्तारण प्रक्रिया काफी आसान और व्यवस्थित हो जाएगी। प्लांट में सूखे कचरे से प्लास्टिक, लोहा, कांच और रीसाइक्लिंग लायक सामग्री को अलग-अलग छांटा जाएगा।

निगम को मिलेगी अतिरिक्त आय
रिसाइकिल होने योग्य इन सामग्रियों को बाजार में बेचकर नगर निगम अपनी आय बढ़ाएगा।
2027 तक पूरा होगा लक्ष्य: दोनों परियोजनाओं को वर्ष 2027 तक पूरी तरह चालू करने की समय सीमा तय की गई है।

गीले कचरे से तैयार होगी जैविक खाद
एमआरएफ प्लांट के साथ ही यार्ड में लगभग 2.60 करोड़ रुपये की लागत से एक कंपोस्ट प्लांट का निर्माण भी चल रहा है। इस प्लांट में शहर से निकलने वाले गीले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा और उससे उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाई जाएगी।

पर्यावरण सुरक्षा के साथ आर्थिक लाभ
तैयार जैविक खाद का प्राथमिक उपयोग नगर निगम के पार्कों और उद्यानों में किया जाएगा। इसके बाद बची हुई अतिरिक्त खाद को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से एक तरफ डंपिंग यार्ड पर कचरे का दबाव घटेगा, वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक निस्तारण से पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और निगम को आर्थिक मुनाफा होगा।

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