रांची। झारखंड में नदियों, तालाबों, झरनों, खदानों के गड्ढों और पर्यटन स्थलों पर डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने स्थायी रणनीति तैयार करने की पहल शुरू की है। इसके तहत राज्य में ‘स्टेट एक्शन फ्रेमवर्क फॉर ड्राउनिंग प्रिवेंशन’ तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य जल दुर्घटनाओं की रोकथाम के साथ संभावित जोखिम वाले स्थानों पर पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है।
डूबने की घटनाओं को रोकने के लिए बनेगी कार्ययोजना
- राज्य में डूबने से होने वाली मौतों की रोकथाम के लिए स्टेट एक्शन फ्रेमवर्क तैयार होगा।
- जल दुर्घटनाओं वाले संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया जाएगा।
- हाई रिस्क वाले स्थानों पर सुरक्षा बैरियर और स्थायी रस्सियां लगाने पर जोर होगा।
- प्राथमिक बचाव उपकरण उपलब्ध कराने की योजना है।
- स्थानीय समुदायों को जल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा।
90 दिनों की कार्ययोजना पर बनी सहमति
होटल चाणक्य बीएनआर में नेशनल हेल्थ मिशन झारखंड और गैर सरकारी संस्था सिनी की तकनीकी मदद से उच्चस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, वन एवं पर्यावरण और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ यूनिसेफ और पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में जल दुर्घटनाओं से निपटने के लिए 90 दिनों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।
2025 में डूबने से 161 लोगों की मौत
बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मई से जुलाई 2025 के बीच झारखंड में डूबने से 161 लोगों की जान गई थी। औसतन प्रतिदिन करीब दो मौतों का यह आंकड़ा जल दुर्घटनाओं की गंभीरता को दर्शाता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू करने के बजाय पहले से बचाव की व्यवस्था करना अधिक प्रभावी होगा। इसके लिए जोखिम वाले स्थानों की पहचान कर वहां सुरक्षा इंतजाम किए जाने पर जोर दिया गया।
पर्यटन स्थलों और जलस्रोतों पर विशेष सुरक्षा
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बढ़ते ईको-टूरिज्म को देखते हुए पर्यटन से जुड़े पंचायतों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच जल सुरक्षा और बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई।
बनेगा बहु-विभागीय कार्य समूह
स्टेट एक्शन फ्रेमवर्क के तहत एक बहु-विभागीय कार्य समूह गठित किया जाएगा। यह समूह पूरे राज्य में जल दुर्घटनाओं की निगरानी, मौसम आधारित तैयारी और सुरक्षा उपायों को जमीन पर लागू करने की दिशा में काम करेगा।
कार्य समूह हाई रिस्क वाले स्थानों को चिन्हित कर वहां सुरक्षा बैरियर, स्थायी रस्सियां और प्राथमिक बचाव उपकरण उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित और जागरूक करने की दिशा में भी काम करेगा। सरकार का उद्देश्य हादसा होने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय हादसों को पहले ही रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है।
