Skip to main content

Birsa Times

सरहद पर कैसे मनाते हैं जवान दिवाली? जीरो लाइन पर दीये जलाकर देश की सुरक्षा का दिया भरोसा

सरहद पर कैसे मनाते हैं जवान दिवाली? जीरो लाइन पर दीये जलाकर देश की सुरक्षा का दिया भरोसा

एलओसी, अखनूर (जम्मू-कश्मीर): देशभर में जब दिवाली के मौके पर घर-आंगन दीयों और रोशनी से जगमगा रहे होते हैं, परिवार एक-दूसरे के साथ खुशियां बांट रहे होते हैं, तब भारतीय सेना के जवान सरहद पर देश की सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं। उनके लिए दिवाली की शुरुआत मिठाइयों और आतिशबाजी से नहीं, बल्कि हथियारों, गश्त और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों से होती है। जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में भारत-पाकिस्तान सीमा की जीरो लाइन पर तैनात जवानों ने भी कुछ इसी अंदाज में रोशनी का त्योहार मनाया।

ईटीवी भारत की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट में सरहद पर तैनात जवानों की दिवाली और उनकी रोजमर्रा की सैन्य गतिविधियों की झलक सामने आई है। आधुनिक हथियारों, ड्रोन और रोबोटिक तकनीक के सहारे भारतीय सेना के जवान सीमाओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि देशवासी बिना किसी डर के अपने त्योहार मना सकें।

दिवाली के दिन भी ROP की सतर्कता से होती है शुरुआत

सीमा पर तैनात जवानों की दिनचर्या दिवाली के दिन भी सामान्य दिनों की तरह ही शुरू होती है। रोड ओपनिंग पार्टी (ROP) के जवान एंटी-माइन डिटेक्शन उपकरणों के साथ सड़कों और आसपास के इलाकों की जांच करते हैं। उनका मुख्य काम सेना के वाहनों की आवाजाही शुरू होने से पहले रास्तों को सुरक्षित करना है।

इस काम में अब ड्रोन तकनीक भी मददगार साबित हो रही है। ड्रोन उन इलाकों पर नजर रखता है, जहां जवानों के लिए सीधे निगरानी करना मुश्किल होता है। इससे संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलती है।

रास्तों को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद सेना के ट्रकों और अन्य वाहनों की आवाजाही शुरू होती है। इसके बाद ROP की टीम दूसरे इलाकों में सुरक्षा जांच और निगरानी के काम में जुट जाती है।

एंटी-टैंक गन से लैस बुलेटप्रूफ वाहन से निगरानी

एलओसी पर निगरानी के लिए बुलेटप्रूफ वाहनों का भी इस्तेमाल किया जाता है। एंटी-टैंक गन से लैस ये वाहन सीमा के अलग-अलग हिस्सों में गश्त करते हैं। जवान इनके माध्यम से बाड़ की सुरक्षा और दूसरी ओर की गतिविधियों पर नजर रखते हैं।

मोर्टार गन से अभ्यास, ड्रोन से सटीक निगरानी

सीमा पर तैनात सैनिकों के लिए नियमित सैन्य अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण है। दिवाली के दिन भी जवानों की एक टुकड़ी खुले मैदान में मोर्टार गन के साथ अभ्यास करती नजर आई। इनका उद्देश्य किसी भी संभावित हमले या युद्धविराम उल्लंघन की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार रहना है।

रिपोर्ट के अनुसार, इन मोर्टार गनों की मारक क्षमता करीब पांच किलोमीटर तक बताई गई है। पहले जवानों को गोलों के गिरने के स्थान का आकलन स्वयं करना पड़ता था, लेकिन अब ड्रोन की मदद से उनकी सटीक स्थिति का पता लगाने में सहायता मिलती है।

रिपोर्ट में पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें भारतीय सेना की सैन्य क्षमताओं और आधुनिक तकनीक की भूमिका सामने आई थी।

रोबोटिक म्यूल से आसान हुई सीमा पर गश्त

भारतीय सेना की निगरानी और रसद व्यवस्था में रोबोटिक म्यूल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह एक रोबोटिक चौपाया वाहन है, जो दुर्गम इलाकों में जवानों की मदद करता है।

इसकी मदद से सैनिकों को जोखिम वाले क्षेत्रों में जरूरी सामान और हथियार पहुंचाने में सहायता मिलती है। यह रोबोटिक म्यूल करीब 20 किलोग्राम तक हथियार और गोला-बारूद ले जाने में सक्षम बताया गया है। खासकर गोलीबारी या मुश्किल परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल जवानों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

जीरो लाइन पर दीये जलाकर मनाई दिवाली

सीमा पर दिनभर सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारियां निभाने के बाद जवानों ने जीरो लाइन के पास बाड़ के समीप दीये जलाकर दिवाली मनाई। भारत माता के जयकारों के बीच सैनिकों ने एक-दूसरे को त्योहार की शुभकामनाएं दीं। परिवारों से दूर रहकर भी जवानों के चेहरों पर त्योहार का उत्साह दिखाई दिया।

ईटीवी भारत से बातचीत में एक जवान ने देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “मैं देश के लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं देता हूं और उन्हें भरोसा दिलाता हूं कि जब तक हम सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। वे खुशी-खुशी दिवाली मनाएं।”

सीमा पर तैनात इन जवानों के लिए दिवाली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के प्रति अपने संकल्प को दोहराने का अवसर भी है। वे खुद अपने परिवारों से दूर रहकर ड्यूटी निभाते हैं, ताकि देश के करोड़ों परिवार सुरक्षित माहौल में त्योहार मना सकें।

administrator

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *