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मुंगेर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बड़ा खेल, दो सीओ पर कसा विभागीय शिकंजा; जांच शुरू

मुंगेर में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बड़ा खेल, दो सीओ पर कसा विभागीय शिकंजा; जांच शुरू

-16 एकड़ 40 डिसमिल गैरमजरूआ जमीन में करीब एक एकड़ के म्यूटेशन का आरोप
-नियम-17(2) के तहत जांच शुरू
ब्यूरो चीफ, मुंगेर
धरहरा (मुंगेर):
मुख्यमंत्री के गृह जिला मुंगेर में सरकारी जमीन के अभिलेखों में कथित हेराफेरी का मामला अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तक पहुंच गया है। धरहरा अंचल के सराधी मौजा में 16 एकड़ 40 डिसमिल गैरमजरूआ खास सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव कर उसके एक हिस्से का दाखिल-खारिज करने के आरोप ने राजस्व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले में विभाग ने वर्तमान सीओ वीरेंद्र कुमार और पूर्व सीओ पूजा कुमारी के खिलाफ बिहार सरकारी सेवक नियमावली के नियम-17(2) के तहत विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।
मामला केवल म्यूटेशन तक सीमित नहीं है। आरोप है कि जिस भूमि को सरकारी अभिलेख में गैरमजरूआ खास, पुरानी किस्म परती के रूप में दर्ज किया गया था, उसी के एक हिस्से को दूसरे व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज कर दिया गया।

16 एकड़ 40 डिसमिल सरकारी जमीन, करीब एक एकड़ का म्यूटेशन
विभागीय संकल्प के अनुसार सराधी मौजा के खाता संख्या 457, खेसरा संख्या 153 में कुल 16 एकड़ 40 डिसमिल भूमि दर्ज है। खतियान में यह जमीन गैरमजरूआ खास और पुरानी किस्म परती के रूप में दर्ज है। आरोप है कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना इसमें से करीब एक एकड़ भूमि का दूसरे व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज कर दिया गया। अब जांच का मुख्य बिंदु यही है कि जब जमीन सरकारी रिकॉर्ड में गैरमजरूआ खास के रूप में दर्ज थी तो उसके स्वामित्व में बदलाव किस आधार पर हुआ।

पंजी-2 और परिमार्जन की प्रविष्टियों पर सवाल
शिकायतकर्ता संदीप कुमार की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में परिमार्जन कर दाखिल-खारिज का रास्ता तैयार किया गया। जांच के दौरान बंदोबस्ती परवाना सहित आवश्यक अभिलेखों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठे हैं। विभागीय रिकॉर्ड में खेसरा 153 को गैरमजरूआ मालिक, जबकि खेसरा 155 को रैयती भूमि बताया गया है।
विभागीय जांच में यह देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में परिवर्तन किस आदेश के आधार पर किया गया और क्या म्यूटेशन से पहले मूल खतियान, पंजी-2 और बंदोबस्ती परवाना का नियमानुसार सत्यापन किया गया था।

दोनों सीओ के स्पष्टीकरण से विभाग असंतुष्ट
मामले में वर्तमान सीओ वीरेंद्र कुमार और पूर्व सीओ पूजा कुमारी से विभाग ने स्पष्टीकरण मांगा था। दोनों के जवाब और जिला प्रशासन की स्थल जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद विभाग ने असंतोष जताते हुए दोनों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का फैसला लिया है।

सेवानिवृत्त सीओ पर भी गाज
इसी आदेश में टेटिया बंबर के तत्कालीन एवं अब सेवानिवृत्त सीओ विनोद कुमार गुप्ता से जुड़े पुराने भ्रष्टाचार मामले में भी कार्रवाई की गई है। दोष सिद्ध होने के बाद सरकार ने उनकी ग्रेच्युटी राशि में 10 प्रतिशत की एकमुश्त कटौती का दंड निर्धारित किया है।

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