-शहडोल से राजेश कुमार यादव
गोहपारू। “खाकी सिर्फ फर्ज नहीं निभाती, जिंदगी भी बचाती है”—इस कहावत को मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को गोहपारू थाना क्षेत्र के ग्राम असवारी में तैनात डायल 112 के जांबाज आरक्षक मोनू शर्मा ने सच कर दिखाया भोपाल कंट्रोल रूम से इवेंट मिलते ही आरक्षक मोनू शर्मा ने अपनी जान की परवाह न करते हुए जिस मुस्तैदी और अदम्य साहस का परिचय दिया, उससे न केवल एक 17 वर्षीय मासूम की जान बची, बल्कि खाकी का सिर भी गर्व से ऊंचा हो गया।
-पलक झपकते ही लिया फैसला, बिना समय गंवाए पहुंचे मौके पर
घटना 22 सितंबर 2026 की है, जब ग्राम असवारी निवासी देवती सिंह गोड़ (17 वर्ष), पिता रामबहोर सिंह गोड़, परिजनों द्वारा मोबाइल न दिलाने से नाराज होकर कुएं में कूद गई। जैसे ही डायल 112 (FRV-17) को सूचना मिली, आरक्षक मोनू शर्मा और पायलट प्रभाकर मिश्रा बिना एक सेकंड का विलंब किए चीते की रफ्तार से मौके पर पहुंचे।

-आरक्षक मोनू शर्मा की तत्परता ने टाला बड़ा हादसा
घटनास्थल पर पहुंचते ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आरक्षक मोनू शर्मा ने अभूतपूर्व सूझबूझ और जांबाजी दिखाई। एक-एक पल कीमती था, लेकिन आरक्षक शर्मा ने बिना झिझक के मोर्चे को संभाला। उनकी त्वरित सोच, साहसिक निर्णय और बिना पल गंवाए उठाए गए कदम के कारण ही किशोरी को सकुशल कुएं से बाहर निकाला जा सका। यदि आरक्षक मोनू शर्मा पहुंचने में जरा सी भी देरी करते या सोचने में समय गंवाते, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।
-पूरे इलाके में हो रही आरक्षक की भूरि-भूरि प्रशंसा
आरक्षक मोनू शर्मा की इस अदम्य कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा ने पूरे असवारी गांव और गोहपारू क्षेत्र के लोगों का दिल जीत लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर आज देवती सही-सलामत अपने परिवार के बीच है, तो इसका पूरा श्रेय आरक्षक मोनू शर्मा की त्वरित निर्णय क्षमता और देवदूत जैसी मुस्तैदी को जाता है।
कुएं से निकालने के बाद आरक्षक मोनू शर्मा ने अपनी मानवीय संवेदनाओं का परिचय देते हुए किशोरी और परिजनों की काउंसलिंग की और उन्हें जीवन का महत्व समझाया। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों द्वारा आरक्षक मोनू शर्मा के इस अनुकरणीय एवं साहसिक कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की जा रही है।
