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गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंतिम संस्कार, पैरोल पर छूटी पत्नी रिया की मौजूदगी में बेटे अक्षत ने दी मुखाग्नि

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंतिम संस्कार, पैरोल पर छूटी पत्नी रिया की मौजूदगी में बेटे अक्षत ने दी मुखाग्नि

पलामू। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह उसके पैतृक गांव पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के मरहा पथरा गांव में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हो गया। एक दिन के पैरोल पर चाईबासा जेल से बाहर आई पत्नी रिया सिन्हा और परिजनों की मौजूदगी में सुजीत सिन्हा के 12 वर्षीय पुत्र अक्षत कुमार ने धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अपने पिता को मुखाग्नि दी। गांव के कररबार नदी तट अंतिम संस्कार हुआ। अंतिम यात्रा में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।

इससे पहले मंगलवार को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को बुधवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एक दिन के पैरोल पर जमानत दे दी गई। अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए रिया सिन्हा पुलिस वैन से उतरीं, वहां मौजूद लोगों की निगाहें उसकी ओर टिक गईं। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच वह सीधे अपने पति के पार्थिव शरीर के पास पहुंचीं। सुजीत सिन्हा का शव देखते ही रिया अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सकीं और पार्थिव शरीर से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। पत्नी बार कह रही थी ‘जान’ तुम कहाँ चले गए, किस पापी ने ऐसा किया।

उसके साथ पुत्र अक्षत कुमार सिन्हा भी अपने पिता के शव से लिपटकर बिलख पड़ा। मां-बेटे के इस दृश्य ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और आसपास के लोग पथरा गांव पहुंचते रहे। पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। संभावित भीड़ और सुरक्षा स्थिति को देखते हुए पलामू जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद रहा।

हुसैनाबाद से लेकर मरहा पथरा गांव तक भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। गौरतलब है कि हाल ही में जामताड़ा जिले में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सुजीत सिन्हा का शव उनके छोटे भाई अरुण के साथ मंगलवार को गांव पहुंचा था, जहां परिजनों की ओर से पत्नी की पैरोल प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जा रहा था। पलामू सिविल कोर्ट में कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर पत्नी को एक दिन का पैरोल दिया गया। इसके बाद चाईबासा जेल से पत्नी को हुसैनाबाद लाया गया।

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