शहडोल से राजेश कुमार यादव
आजादी के अमृत काल में जब देश मंगलयान और डिजिटल क्रांति की बात कर रहा है, तब शहडोल जिले के जनपद पंचायत गोहपारू से एक ऐसी तस्वीर निकलकर सामने आई है जो हमारे सिस्टम की जड़ों में लगी ‘लापरवाही की दीमक’ को उजागर करती है। ग्राम पंचायत खाम्हा की रहने वाली 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला मानवती की है आज जिंदा रहने के लिए सरकारी मदद नहीं, बल्कि गांव की गलियों में भीख मांगने को मजबूर हैं।
वीडियो में छलका दर्दः “साहब, अब हाथ नहीं उठते भीख मांगने को…”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक हृदयविदारक वीडियो में मानवती का है हाथ जोड़कर रोते हुए अपनी व्यथा सुना रही हैं। उनकी आंखों में मोतियाबिंद या दृष्टिहीनता का अंधेरा है, और जीवन में प्रशासनिक अनदेखी का। वीडियो में वे सीधे तौर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर को संबोधित करते हुए कहती हैं- “साहब ! मेरी उम्र 60 साल हो गई, आंखों से कुछ दिखता नहीं। 2 महीने से पेंशन के लिए भटक रही हूं। भीख मांगकर कब तक पेट भरूंगी पेंशन चालू करवा दो।”
भ्रष्टाचार या लापरवाही? सचिव की मेज पर क्यों रुर्व ‘सांसें’?
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत खाम्हा के सचिव की भूमिका सबसे संदिग्ध और गैर-जिम्मेदाराना नजर आ रही है। सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो माह पहले मानवती ने पेंशन के लिए आवेदन की फाइल गाड़ी से ले जाकर सचिव को सौंपी थी।
सवाल यह है कि जब महिला ‘अति-पात्र’ की श्रेणी में आती है, तो 2 महीने तक आवेदन पोर्टल पर क्यों नहीं चढ़ा?
क्या सचिव को एक दृष्टिबाधित बुजुर्ग महिला की बेबसी नजर नहीं आई?
क्या प्रशासन तब जागेगा जब यह लाचारी किसी बड़ी अनहोनी में बदल जाएगी
सरकारी दावों की खुली पोल
मुख्यमंत्री की ‘जन सेवा’ और ‘अंत्योदय’ की योजनाएं गोहपारू के खाम्हा गांव में आकर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ सरकार कहती है कि बुजुर्गों को दफ्तर आने की जरूरत नहीं, प्रशासन उनके द्वार जाएगा। लेकिन मानवाती का मामला बताता है कि यहाँ ‘द्वार’ तो दूर, दफ्तर में आवेदन देने के बाद भी बुजुर्गों को भीख मांगनी पड़ रही है।
- क्या इस वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर तत्काल पेंशन मंजूर की जाएगी?
- क्या उस लापरवाह सचिव पर कार्रवाई होगी जिसने एक बुजुर्ग महिला की फाइल को रद्दी समझकर दबा रखा है?
- क्या मानवाती को भीख मांगने के कलंक से मुक्ति मिलेगी?
जब इस संबंध में पंचायत सचिव को दो बार फोन लगाया गया लेकिन सचिव साहब का फोन नहीं उठा
