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वादों की सड़क पर कीचड़ का राज: चुनाव में भरोसा, बरसात में बेबसी कचनपुर के 150 घर आज भी सड़क के इंतजार में

वादों की सड़क पर कीचड़ का राज: चुनाव में भरोसा, बरसात में बेबसी कचनपुर के 150 घर आज भी सड़क के इंतजार में

आदिवासी एक्सप्रेस संवाददाता
छतरपुर,(पलामू)।
छतरपुर प्रखंड अंतर्गत कचनपुर पंचायत के ग्रामीण वर्षों से एक ऐसी सड़क की मांग कर रहे हैं, जो उनके लिए सिर्फ विकास का नहीं बल्कि जीवन और सुरक्षा का भी सवाल बन चुकी है। हीरामन राम के घर से चंद्रशेखर पासवान के घर होते हुए झुमलवा नदी श्मशान घाट केवल तक जाने वाली सड़क आज भी बदहाल है। बरसात शुरू होते ही सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है और बीच में पड़ने वाली नदी के कारण आवागमन लगभग ठप हो जाता है।आज तक सिर्फ जनप्रतिनिधि के द्वार अस्वासन मिली,सड़क का मुद्दा भी फाइलों में दब जाता है।

सड़क निर्माण का वर्षों से सिर्फ आश्वासन
हीरामन राम के घर से चंद्रशेखर पासवान के घर होते हुए झुमलवा नदी श्मशान घाट केवल तक सड़क निर्माण का कई बार आश्वासन मिला, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।

बरसात में टूट जाता है संपर्क
सड़क के बीच नदी होने के कारण बारिश के दिनों में आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है।बाइक चलाना तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। मरीज, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशानी झेलते हैं।

ग्रामीणों ने चंदा कर भरे थे गड्ढे
वर्ष 2025 में पीछूलिया गांव के ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर सड़क के गड्ढों को भरवाया था।लेकिन पहली ही बारिश में वह मरम्मत बह गई और सड़क फिर पहले जैसी हो गई।

दैनिक समाचारों एवं विभिन्न चैनलों में खबर चलाने के बाद मंत्री ने लिया था संज्ञान
वर्ष 2025 में समाज जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तत्काल संज्ञान लिया था।इससे ग्रामीणों में उम्मीद जगी कि अब सड़क बनेगी, लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

करूपा 125 से 150 परिवारों की जीवनरेखा

यह सड़क लगभग 125 से 150 घरों को जोड़ती है। सड़क करूपा रोड होते हुए गांव तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग है।

चुनाव के समय वादे, बाद में भूल-
ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर गांव पहुंचते हैं, लोगों के बीच बैठते हैं, दूध-दही-गुड़ खाते हैं और सड़क निर्माण का वादा करते हैं।चुनाव जीतने के बाद सड़क की समस्या जस की तस बनी रहती है। छठ पर्व से पहले भी मिला था भरोसा वर्ष 2025 में शिकायत के बाद मंत्री गांव पहुंचे और कहा कि छठ पर्व से पहले सड़क को कम से कम चलने लायक बना दिया जाएगा।लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह घोषणा भी केवल आश्वासन बनकर रह गई। मई 2026 में जनसंवाद, फिर वही भरोसा,मई 2026 में मंत्री रात लगभग 9 बजे गांव पहुंचे और जनसंवाद किया।उस दौरान भी सड़क निर्माण का भरोसा दिया गया, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ।ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष पंचायत की मुखिया सरस्वती देवी द्वारा गांव में लगभग 200 फीट पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है।लेकिन मुख्य जर्जर मार्ग अब भी अधूरा है और सबसे बड़ी समस्या बना हुआ है।

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव में सड़क निर्माण सबसे बड़ा मुद्दा बनता है। नेता गांव में पहुंचकर जल्द निर्माण कराने का भरोसा देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वादे भी खत्म हो जाते हैं। बरसात आते ही गांव की तस्वीर फिर वही हो जाती है—कीचड़, जलभराव और टूटी सड़क।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी सड़क और नदी पर पुल या पुलिया का निर्माण नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में किसी बड़ी दुर्घटना या आपात स्थिति में लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

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