-पीड़ित ने उपायुक्त से लगाई न्याय की गुहार, दंडाधिकारी पर अभिलेख रोकने और निष्पक्ष सुनवाई नहीं करने का आरोप
देवघर: देवघर जिले के पालोजोरी अंचल अंतर्गत बसाहा गांव निवासी रावण गोस्वामी ने मधुपुर न्यायालय के एक दंडाधिकारी पर न्यायिक प्रक्रिया में मनमानी बरतने का आरोप लगाते हुए देवघर उपायुक्त (डीसी) के नाम पर शिकायत पत्र सौंपा है। बता दें शिकायत में उन्होंने अपनी रैयती भूमि से जुड़े मामले में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने तथा न्यायिक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात कही है। वहीं पीड़ित के अनुसार, उनकी पुश्तैनी रैयती भूमि से संबंधित ‘चंद्रशेखर तिवारी बनाम रावण गोस्वामी’ (वाद संख्या 163/2016) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 145 के तहत मधुपुर न्यायालय में लंबित है। तथा उनके द्वारा जबरन मेरे मूल रैय्यती जमीन को अपना फर्जी कागज़ात के सहारे मेरे जमीन को अपना हक जमाते हुवे। व पैसों की धौंस पर मेरे घर जमीन को हथियाना चाह रहे हैं। जबकि यह ज़मीन मेरे पुरखों का खतियानी गेंजर बंदोबस्त का है। वहीं इस ज़मीन को मेरे विपक्षी द्वारा कुर्फ़ा (यानि) खरीद परोक्त के लेने की बात कही जा रही हैं। जो कि सारासर झूठ बेबुनियाद हैं। जबकि रामनारायण गोस्वामी ने कहा कि ज़मीन में मेरे पूर्वजों द्वारा वसोवास करते हुवे आ रहे हैं।जबकि उनका आरोप है कि कुछ लोग उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
शिकायत पत्र में रावण गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने 23 जून 2026 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 348 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन उस पर न तो सुनवाई की गई और न ही कोई आदेश पारित किया गया। उनका यह भी दावा है कि बिना उनका विस्तृत पक्ष सुने मामले को अंतिम आदेश के लिए सुरक्षित रख लिया गया।
पीड़ित ने आगे आरोप लगाया कि न्याय मिलने की उम्मीद कम होने पर उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), मधुपुर के समक्ष धारा 411 के तहत वाद स्थानांतरण का आवेदन दिया। शिकायत के अनुसार, एसडीओ द्वारा संबंधित न्यायालय से अभिलेख तलब किए जाने के बावजूद अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। साथ ही, उन्हें स्वयं भी वाद अभिलेख देखने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
रावण गोस्वामी ने उपायुक्त से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित आरोपों की जांच कराने तथा विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित दंडाधिकारी या न्यायालय की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जिला प्रशासन द्वारा शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
देवघर कोर्ट में मनमानी का आरोप: धारा 348 के आवेदन पर सुनवाई नहीं, केस ट्रांसफर आदेश की भी अनदेखी का दावा
