पत्थर-स्टोन क्रशर धारियों में मचा कोहराम
अरशद ने किया स्वागत
हाईकोर्ट का आदेश राज्य के सभी 24 जिलों पर लागू
सैंकड़ों खनन पट्टा-स्टोन क्रशर का लाईसेंस होगा रद्द
अंतिम फैसला 18 जुन को पारित होगा
झारखंड। चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर ने झारखण्ड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की बेंच के द्वारा गुरूवार को पारित आदेश का तहे दिल से स्वागत किया है जिसमें हाईकोर्ट ने झारखंड राज्य प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के वर्ष 2015 व 2017 के उस अधिसूचना को रद्द कर दिया जिसमें पत्थर खनन पट्टा व स्टोन क्रशर का लाईसेंस लेने के लिए निर्धारित दुरी वन भुमि से 500 व 400 मीटर से घटा कर 250 मीटर कर दिया था.हाईकोर्ट के इस फैसले से अब पत्थर खनन पट्टा के लिए वन भुमि से दुरी 500 मीटर व स्टोन क्रशर का लाईसेंस लेने में वन भुमि से ये दुरी 400 मीटर की होगी.अरशद ने इसे पर्यावरण प्रेमीयों व झारखंड वासियों की ऐतिहासिक जीत करार देते हुए इसे पर्यावरण व वन संरक्षण में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए जल वायु ध्वनि प्रदूषण में दुरगामी राहत देने वाला फैसला करार दिया है.हाईकोर्ट का ये फैसला राज्य के समस्त 24 जिलों पर लागू होगा.हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के सैंकड़ों पत्थर खनन पट्टा व स्टोन क्रशर का लाईसेंस रद्द होने के साथ ही पत्थर व स्टोन क्रशर में अरबों रुपये का निवेश डुबने के साथ राज्य में बेरोजगारी भी बढ़ेगी जिसका असर बाज़ार पर पड़ने की संभावना है तो दुसरी ओर हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक निर्णय से राज्य में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा.हाईकोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले से पत्थर-स्टोन क्रशर धारियों में हड़कंप मच गया है तो दुसरी ओर पर्यावरण प्रेमीयों में खुशी की लहर देखी जा रही है.हाईकोर्ट ने इस मामले के सभी पक्षकारों से 12 जुन तक अतिरिक्त पक्ष रखने की स्वतंत्रता देते हुए 18 जुन को अंतिम फैसला सुनाने के लिए सूचिबद्ध किया है.अब सभी की नजरें 18 जुन के फैसले पर टिक गईं है.
