आदिवासी एक्सप्रेस/ लालू कुमार यादव
हुसैनाबाद,पलामू। हुसैनाबाद में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सामने आई दो तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। एक ओर थाना परिसर में पिछले वर्ष एसडीपीओ के नेतृत्व में “नो योर फ्रेंड एंड नो योर एनेमिज” विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित कर पुलिस-जनता के बीच बेहतर समन्वय और विश्वास कायम करने की बात कही गई, वहीं दूसरी ओर हाल ही में हुसैनाबाद के एक मेडिकल दुकानदार ने थाना प्रभारी चंदन कुमार पर अभद्र व्यवहार, धमकी और उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाकर पुलिस महकमे की छवि पर सवालिया निशान लगा दिया है। नगर पंचायत क्षेत्र के राम बिगहा निवासी मेडिकल दुकानदार मुन्ना पाल ने आरोप लगाया है कि थाना प्रभारी चंदन कुमार ने उन्हें बिना कारण बुलाकर गाली-गलौज की, कॉलर पकड़कर अपमानित किया और दुकान में आग लगाने तक की धमकी दी। पीड़ित ने इस मामले की शिकायत झारखंड के पुलिस महानिदेशक से करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ, पूर्व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एस. मोहम्मद याकूब के नेतृत्व में थाना परिसर में आयोजित कार्यशाला में पुलिस और जनता के बीच विश्वास, सहयोग और अपराध नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया था। मुखिया प्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों को समाज में मित्र और शत्रु की पहचान कर शांति व्यवस्था बनाए रखने की सीख दी गई।
इन दोनों घटनाओं के बीच विरोधाभास साफ नजर आता है। एक तरफ पुलिस जनता को अपना मित्र बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ आम नागरिक खुद को असुरक्षित और अपमानित महसूस कर रहा है। सच यही है कि “हंसना और गाल फुलाना एक साथ संभव नहीं है।” यदि पुलिस को समाज का विश्वास जीतना है, तो उसे अपने व्यवहार में भी उसी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना होगा, जिसकी अपेक्षा वह जनता से करती है।
