-भवन निर्माण पर खर्च हुए लाखों रुपये, फिर भी बच्चों को नहीं मिला सुरक्षित शिक्षण केंद्र
आदिवासी एक्सप्रेस/दीपक यादव
पांडू,पलामू। पांडू प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कजरू कला के मुरूमातू गांव में आंगनबाड़ी व्यवस्था की बदहाली सामने आई है।गांव में लगभग 10 वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बनाया गया था,लेकिन भवन आज तक पूर्ण रूप से उपयोग में नहीं आ सका।लंबे समय तक उपेक्षा और रखरखाव के अभाव में भवन जर्जर होकर खंडहर में तब्दील होने लगा है।स्थिति यह है कि भवन उपलब्ध होने के बावजूद गांव के नौनिहाल आज भी फूस की मड़ई (झोपड़ी) में बैठकर प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।मंगलवार को दोपहर करीब 1 बजे ग्रामीणों के साथ आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान केंद्र पर न तो सेविका मौजूद थीं और न ही सहायिका।केंद्र में बच्चों की पढ़ाई या अन्य गतिविधियां संचालित होती नहीं मिलीं,जिससे ग्रामीणों में नाराजगी देखी गई।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण,प्रारंभिक शिक्षा एवं समग्र विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है,लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही के कारण योजनाओं का अपेक्षित लाभ बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहा है।उनका आरोप है कि केंद्र का नियमित संचालन नहीं होने से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
-लाखों रुपये की लागत से बना नया आंगनबाड़ी भवन आज तक अधूरा और अनुपयोगी क्यों पड़ा है?
-निर्माण के बाद भवन खंडहर की स्थिति में कैसे पहुंच गया?
-सरकारी धन का इस प्रकार उपयोग और उसकी बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन है?
-जब भवन उपलब्ध है तो बच्चों को फूस की मड़ई में पढ़ने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है?
-मंगलवार दोपहर 1 बजे केंद्र पर सेविका और सहायिका अनुपस्थित क्यों थीं?
-क्या निर्धारित कार्य अवधि से पहले केंद्र बंद करना विभागीय नियमों के अनुरूप है?
यदि केंद्र का नियमित संचालन नहीं हो रहा है तो बच्चों के नाम पर मिलने वाली सरकारी सुविधाओं का लाभ वास्तव में किसे मिल रहा है? ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा आंगनबाड़ी केंद्र का नियमित एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित करने की मांग की है।इस संबंध में कजरू कला पंचायत के मुखिया इसरार अंसारी ने बताया कि उन्होंने कई बार सेविका को समय पर केंद्र में उपस्थित रहने की हिदायत दी है।उन्होंने कहा कि सेविका वर्तमान में विश्रामपुर में रहती हैं,जिसके कारण अक्सर समय पर केंद्र नहीं पहुंच पाती हैं और केंद्र का नियमित संचालन प्रभावित होता है।वहीं, प्रखंड विकास पदाधिकारी रणवीर कुमार ने कहा, “मामले की जानकारी ली जाएगी।संबंधित सुपरवाइजर से बात कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

