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खुशबू हत्याकांड : आरोपी पति को मिली उम्रकैद की सजा, कोर्ट ने ₹25000 का आर्थिक दंड भी लगाया; चार साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय

खुशबू हत्याकांड : आरोपी पति को मिली उम्रकैद की सजा, कोर्ट ने ₹25000 का आर्थिक दंड भी लगाया; चार साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय
  • धरहरा थाना क्षेत्र के मानगढ़ गांव की धटना
  • वर्ष 2021 में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता खुशबू देवी को जिंदा जला दिया गया था
    रंजीत कुमार विद्यार्थी
    मुंगेर : चार साल पुराने चर्चित दहेज हत्या मामले में मुंगेर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए पत्नी को जिंदा जलाकर हत्या करने वाले पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक गुप्ता की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद के साथ 25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है. अदालत ने दहेज प्रताड़ना के आरोप में आरोपी को तीन वर्ष के कारावास की अलग से सजा भी सुनाई है. अदालत ने इस फैसले के बाद मृतका के परिजनों ने कहा कि चार वर्षों के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें न्याय मिला है. यह मामला मुंगेर जिले के धरहरा थाना क्षेत्र के मानगढ़ गांव का है। जहां वर्ष 2021 में दहेज की मांग को लेकर विवाहिता खुशबू देवी को कथित रूप से जिंदा जलाकर मार दिया गया था. मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी पति संजीत कुमार को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई.

दहेज के लिए पत्नी को जलाकर मार डाला था
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक शाहिद कमाल ने बताया कि 27 जून 2021 को आरोपी संजीत कुमार ने दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी खुशबू देवी पर किरासन तेल छिड़ककर आग लगा दी थी।

1 जुलाई 2026 को PMCH में मौत
घटना में खुशबू देवी गंभीर रूप से झुलस गई थीं. उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) भेजा गया, जहां इलाज के दौरान 01 जुलाई 2021 को उनकी मौत हो गई.
सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में अदालत के समक्ष खुशबू देवी का फर्द बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने पति संजीत कुमार को आग लगाकर हत्या करने का जिम्मेदार बताया था. इसी बयान के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया और पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.
सजा के बिंदु पर हुई बहस के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक शाहिद कमाल ने घटना की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड की मांग की. वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कृष्णानंद सिंह ने आरोपी के पक्ष में दलीलें पेश कीं.दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक गुप्ता ने आरोपी को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. साथ ही दहेज प्रताड़ना के मामले में तीन वर्ष के कारावास का भी आदेश दिया.

चार साल की लड़ाई के बाद मिला न्याय
फैसले के बाद मृतका के भाई सोहन कुमार ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने बताया कि खुशबू देवी की शादी घटना से करीब दो वर्ष पहले संजीत कुमार से हुई थी. शादी के बाद परिवार को पता चला कि आरोपी की पहले भी एक शादी हो चुकी हैं । जिसकी मृत्यु हो चुकी है। इतना ही नहीं, खुशबू की शादी के बाद भी उसने दूसरी महिला से विवाह भी कर लिया था । मृतक का भाई सोहन कुमार ने बताया कि आरोपी लगातार दहेज की मांग करता था और उनकी बहन को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था. दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसने एक दिन खुशबू को जलाकर मार डाला. पूरे परिवार ने चार वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया और अब अदालत के फैसले से उन्हें संतोष मिला है.

बोलें, अपर लोक अभियोजक
अपर लोक अभियोजक शाहिद कमाल ने बताया कि, इस मामले में मृतका का इलाज के दौरान दर्ज किया गया फर्द बयान अभियोजन पक्ष के लिए सबसे मजबूत साक्ष्य साबित हुआ.
पुलिस ने उसी बयान को आधार बनाकर अनुसंधान किया और अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई.

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