फॉर्म भरने और ऑनलाइन के नाम पर छात्रों से पैसे लेने की शिकायत, बीईओ बोले—पूरी प्रक्रिया मुफ्त, शुल्क वसूली गलत
आदिवासी एक्सप्रेस ब्यूरो अजय कुमार कुशवाहा
बरहरवा। बरहरवा प्रखंड के उत्क्रमित उच्च विद्यालय, इस्लामपुर में e-Kalyan छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया में छात्रों से अवैध रूप से पैसे वसूले जाने का मामला सामने आया है। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि विद्यालय में छात्रवृत्ति फॉर्म भरने, ऑनलाइन आवेदन कराने तथा अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर छात्रों से राशि ली जा रही है, जबकि विभागीय निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है।
अभिभावकों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति योजना के आवेदन के लिए भी उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। इससे अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई सुविधा के लिए विद्यालय में पैसे लेना पूरी तरह अनुचित है।
मामले की जानकारी लेने पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने स्वीकार किया कि विद्यार्थियों से ₹10 केवल आवेदन फॉर्म के प्रिंटआउट के लिए लिया गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि फॉर्म भरने अथवा ऑनलाइन आवेदन करने के नाम पर किसी भी प्रकार की राशि लेना गलत है। यदि विद्यालय में किसी शिक्षक द्वारा इस प्रकार की वसूली की जा रही है तो उसे तत्काल बंद कराया जाएगा।
वहीं, इस संबंध में जब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि e-Kalyan छात्रवृत्ति आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है और किसी भी छात्र से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि आवेदन के नाम पर विद्यार्थियों से पैसे की वसूली नहीं की जाएगी। यदि कहीं ऐसी शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे प्रकरण के दौरान विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। मौके पर देखा गया कि कक्षा संचालन के समय कई छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर के बाहर खड़े और खेलते नजर आए। इससे विद्यालय में नियमित पठन-पाठन और अनुशासन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग ने e-Kalyan आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह निःशुल्क घोषित किया है तो छात्रों से पैसे किस आधार पर लिए जा रहे हैं। साथ ही, पढ़ाई के समय छात्रों का कक्षा के बजाय विद्यालय के बाहर रहना भी विद्यालय प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
अब सभी की निगाहें शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है तथा विद्यालय में शैक्षणिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

