झूठे वादों को किया चकनाचूर
ग्रामीणों ने किया पक्की सड़क और पुल की मांग
आदिवासी एक्सप्रेस / संतोष कुमार दास
चतरा : कहते हैं कि मजबूत हौसला और समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो बड़ी से बड़ी रुकावट दूर की जा सकती है। इस कहावत को सच करके दिखाया है चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड के गेंजना पंचायत के ढोलिया सलैया गांव में लोगों ने सही साबित कर दिखाया है। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन के झूठे वादों से नाराज होकर खुद ही सड़क और पुल निर्माण का बीड़ा उठाया है। ग्रामीणों ने आपस में चंदा कर श्रमदान दिया और खुद ही सड़क और पुल बनाने में जुट गए। इस दौरान प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों में गहरी नाराजगी देखने को मिली।
गांव में ना पक्की सड़क है और ना पुल
गांव में आजादी के 78 साल बीतने के बाद भी आज तक पुल और पक्की सड़क नहीं बनी है। इस कारण ग्रामीणों को कीचड़मय रास्ते से आवागमन करना पड़ता था गांव से होकर बहने वाली बड़की नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने से गांव के लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत होती थी। बरसात के दिनों में तो लोग घरों में कैद होकर रह जाते हैं या फिर जान जोखिम में डाल कर नदी पार करते हैं। वही स्कूली बच्चे भी बरसात के दिनों में स्कूल नहीं जाने से सीधा उन्हें शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा जाता था।
जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली सुध
कई बार ग्रामीणों ने सड़क और पुल का निर्माण कराने के लिए अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के सिवा आज तक कुछ नहीं मिला। थक हारकर यहां के ग्रामीणों ने खुद चंदा जुटाकर और श्रमदान कर कच्ची सड़क और पुल बनाया। गांव के लोग अब इसी पुल के सहारे आवागमन कर रहे हैं।इस संबंध में ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय नेता आते हैं और बड़े-बड़े वादे कर चले जाते हैं।लेकिन चुनाव जीतने के बाद सब भूल जाते है। वहीं मामले में प्रशासन भी सुध नहीं ले रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि आपसी सहयोग से चंदा इकट्ठा किया और उस राशि से एक जेसीबी मशीन मंगवाई. इसके बाद, गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी एकजुट हो गए।फावड़ा, टोकरी और अन्य औजारों के साथ वे सड़क निर्माण में जुट गए ।उनकी मेहनत का नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों में तीन किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क तैयार हो गई, वही उन्होंने एक पुल का निर्माण भी किया। ग्रामीणों ने बताया कि यह कच्ची सड़क ढोलिया बनारसी राम के घर से सलैया होते हुए लेंजवा मुख्य पथ तक निर्माण किया । ग्रामीण समाजसेवी रामबरत पासवान, अरुण कुमार, विकास कुमार, नंदू यादव, कमलेश कुमार, बाढ़ों यादव, उदय यादव, पिंटू कुमार, मदन यादव, लालदेव यादव, संतन कुमार, छोटू कुमार, मदन भारती, अशोक भारती, उपेंद्र भारती प्रमोद भारती, समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने अब सरकार से पक्की सड़क और पुल की मांग कर रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम में भी आवागमन सुगम हो सके। इधर कुछ गेंजना पंचायवासियों ने कहा, “गांववालों ने प्रशंसनीय काम किया है। एक मिसाल पेश की है, जो सरकार के मुंह पर तमाचा है। जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सबक है। तो”दूसरी तरफ प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा सबूत है।
