गिरिडीह। जिले के जमुआ प्रखंड के धर्मपुर पंचायत मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़क विभागीय उदासीनता की अनदेखी के कारण आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। वर्षों से जर्जर पड़ी इस सड़क की वजह से स्थानीय ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है। सड़क पर प्रशासनिक लापरवाही के बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई गिट्टियां और बाहर निकले नुकीले बोल्डर अब रोजाना हादसों को दावत दे रहे हैं। पंचायत मुख्यालय तक पहुंचने वाली इस महत्वपूर्ण सड़क की दुर्दशा से लोगों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल धर्मपुर गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। धर्मपुर गांव की यह मुख्य सड़क सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आसपास के कई अन्य गांवों को जोड़ने वाली एक लाइफलाइन (प्रमुख मार्ग) है। हर दिन यहां से हजारों लोगों का आवागमन होता है। दुर्घटनाओं का केंद्र: सड़क की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम बात हो गई है। पैदल चलने वाले बुजुर्गों और बच्चों को भी संभल-संभल कर कदम बढ़ाना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति में लाचारी: ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि सबसे बदतर स्थिति तब होती है जब किसी मरीज या गर्भवती महिला को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़ता है। झटकों के कारण मरीजों की जान पर बन आती है। मानसून में थम जाती है जिंदगी: बरसात के दिनों में ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता हैं।
आश्वासनों से टूटा भरोसा, अब आंदोलन की तैयारी
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत को लेकर वे पिछले कई सालों से विभागीय अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं। कई बार लिखित आवेदन सौंपे गए, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले। पंचायत मुख्यालय होने के बावजूद इस सड़क की दुर्दशा शासन-प्रशासन के विकास के दावों की जमीनी हकीकत को साफ बयां करती है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
सड़क का अविलंब नए सिरे से निर्माण किया जाए। आगामी बरसात से पहले संभावित दुर्घटना वाले गड्ढों को भरकर इसे चलने योग्य बनाया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस बार उनकी जायज मांगों को अनसुना किया गया और जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन के लिए विवश होंगे।
