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डीजीपी नियुक्ति मामला: ओडिशा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी, झारखंड समेत अन्य राज्यों पर कल होगी अगली सुनवाई

डीजीपी नियुक्ति मामला: ओडिशा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी, झारखंड समेत अन्य राज्यों पर कल होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली: झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा के DGP नियुक्ति मामले पर सुनवाई हुई, जिसमें वरिष्ठ IPS अधिकारी सुशांत कुमार नाथ का नाम चयन प्रक्रिया से हटाए जाने और उनकी Integrity Certificate से जुड़े मुद्दे पर पक्ष रखा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में UPSC को भेजी गई पात्र अधिकारियों की सूची और बाद में उसमें हुए बदलाव को लेकर भी सवाल उठे हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष ओडिशा सरकार ने अपना पक्ष रखा। सरकार की ओर से बताया गया कि सुशांत कुमार नाथ का नाम शुरू में UPSC को भेजे जाने वाली सूची में शामिल था। इसके बाद सूची में शामिल अधिकारियों के Integrity Certificate को लेकर आवश्यक जानकारी जुटाई गई।

ओडिशा सरकार के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान सीबीआई से भी जानकारी मांगी गई थी। सरकार का कहना है कि सीबीआई की ओर से दी गई जानकारी में SI भर्ती में कथित गड़बड़ी की जांच जारी होने और सुशांत कुमार नाथ से पूछताछ की आवश्यकता पड़ सकने की बात कही गई थी। इसके बाद सरकार ने सूची से उनका नाम हटा दिया और ADG स्तर के कुछ अधिकारियों को DGP रैंक में पदोन्नत किए जाने के बाद संशोधित सूची UPSC को भेजी गई। ओडिशा DGP चयन प्रक्रिया में पात्रता सूची और बाद में अधिकारियों को शामिल किए जाने को लेकर पहले भी अदालत में सवाल उठाए जा चुके हैं।

वहीं, सुशांत कुमार नाथ की ओर से सरकार के इस तर्क का विरोध किया गया। उनकी ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ कोई आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया है और सीबीआई ने भी यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा है कि उनसे पूछताछ निश्चित रूप से की जाएगी। उनका पक्ष है कि सीबीआई की ओर से केवल यह कहा गया था कि भविष्य में पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में इसी आधार पर उनका Integrity Certificate वापस लेना और उनका नाम सूची से हटाना उचित नहीं था।

उनकी ओर से इस पूरी प्रक्रिया को अपने खिलाफ की गई साजिश बताया गया। हालांकि, यह उनके पक्ष की दलील है और अदालत ने इस दावे पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले में मुख्य विवाद यही है कि किसी अधिकारी के खिलाफ चल रही प्रारंभिक जांच या संभावित पूछताछ को DGP चयन के लिए उसकी पात्रता और Integrity Certificate से किस तरह जोड़ा जा सकता है।

ओडिशा DGP नियुक्ति मामले में पहले भी अदालत के समक्ष इस बात पर सवाल उठे हैं कि UPSC को पात्र अधिकारियों की सूची भेजे जाने के बाद उसमें बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए और बाद में DGP रैंक पर पदोन्नत अधिकारियों को सूची में शामिल करने का आधार क्या था। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस मामले में 2006 के Prakash Singh फैसले में DGP चयन को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुपालन से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।

ओडिशा से जुड़े मुद्दे पर बहस के बाद अब झारखंड समेत अन्य राज्यों में DGP नियुक्ति से संबंधित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट में आगे सुनवाई होनी है। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वाद सूची में 23 सितंबर 2026 के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ दर्ज है।

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