ओसेल,पीएनएम,नकाश जैसे निजी कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
टंडवा:चतरा। औद्योगिक नगरी टंडवा में कोयला परिवहन से जुड़ी कुछ निजी ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि कोयला ढुलाई में लगे वाहनों के लिए सड़कों की स्थिति और आम लोगों की परेशानी की अनदेखी करते हुए कंपनियां अपने लाभ को प्राथमिकता दे रही हैं। खासकर सड़कों की मरम्मत के नाम पर ओबी (ओवरबर्डन) और खराब मिट्टी डालने से ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्या गंभीर हो गई है।ग्रामीणों का कहना है कि टंडवा क्षेत्र में सक्रिय कुछ कोल ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों द्वारा सीसीएल की आम्रपाली-चंद्रगुप्त तथा एनटीपीसी की कोयला परियोजनाओं से लगातार भारी मात्रा में कोयले की ढुलाई की जा रही है। 24 घंटे भारी वाहनों के परिचालन से एसएच-7 समेत आम्रपाली-बिंगलात, पिपरवार,केरेडारी और टंडवा क्षेत्र की सड़कों पर दबाव बढ़ गया है। ग्रामीणों के मुताबिक कई सड़कें निर्माण या मरम्मत के कुछ ही समय बाद दोबारा जर्जर हो जा रही हैं।
बारिश में कीचड़, सूखने पर धूल से बढ़ रही परेशानी:जीवन दास
सबसे गंभीर समस्या सड़कों पर ओबी और खराब मिट्टी डाले जाने को लेकर बताई जा रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि खदानों से निकलने वाले ओबी का इस्तेमाल सड़क को मजबूत करने के बजाय कई स्थानों पर भराव के रूप में किया जा रहा है। बारिश के दौरान यही मिट्टी कीचड़ में तब्दील होकर जलजमाव की स्थिति पैदा कर देती है। वहीं, सड़क सूखने के बाद भारी वाहनों के आवागमन से धूल उड़ने लगती है, जिससे राहगीरों और आसपास रहने वाले ग्रामीणों को प्रदूषण का सामना करना पड़ता है।
उड़सू के रैयत जीवन दास ने आरोप लगाया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनके अनुसार, कोयला परिवहन का काम हासिल करने के बाद कंपनियां अपने स्तर से परिचालन करती हैं और सड़क की स्थिति तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि भारी वाहनों के लगातार परिचालन से कई ग्रामीण सड़कों की स्थिति चिंताजनक हो गई है।
सड़क मरम्मत में गुणवत्तापूर्ण सामग्री इस्तेमाल करने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क मरम्मत के नाम पर केवल मिट्टी या कमजोर सामग्री डालने के बजाय गुणवत्तापूर्ण पत्थर, मेटल और निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उड़सू से लेकर लकराही मोड़ और बिंगलात क्षेत्र तक कई स्थानों पर सड़क की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है।ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों के परिचालन और सड़क मरम्मत की मौजूदा व्यवस्था के बीच स्थानीय प्रशासन के सामने भी चुनौती बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सड़क की वैज्ञानिक और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। जीवन दास ने प्रखंड प्रशासन से मांग की है कि संबंधित सड़कों का स्थलीय निरीक्षण कराकर गुणवत्तापूर्ण तरीके से स्थायी मरम्मत कराई जाए तथा सड़कों पर ओबी अथवा अनुपयुक्त मिट्टी के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। साथ ही, भारी वाहनों के परिचालन से उत्पन्न सड़क सुरक्षा और प्रदूषण की समस्या का भी स्थायी समाधान किया जाए। हालांकि, ट्रांसपोर्टिंग कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।संबंधित कंपनियों और प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जा सकता है।
