आदिवासी एक्सप्रेस/राम कुमार
बालूमाथ। एनएलसी इंडिया लिमिटेड की नॉर्थ धाधू वेस्ट पार्ट कोल परियोजना के लिए गुरुवार को बालूमाथ प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई विरोध के कारण अधूरी रह गई। विरोध में जुटे लोगों ने कार्यक्रम स्थल के अस्थायी पंडाल के दोनों प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त पदाधिकारी पंडाल में प्रवेश नहीं कर सके।काफी प्रयास के बावजूद जनसुनवाई शुरू नहीं होने पर जिला भू अर्जन पदाधिकारी प्रभात कुमार ने कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा की।एनएलसी इंडिया लिमिटेड के सीजीएम अभय भगत ने परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि अगले 42 वर्षों में नॉर्थ धाधू वेस्ट पार्ट परियोजना से प्रतिवर्ष 4.5 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। इसके लिए बालूमाथ प्रखंड के हेमपुर, भैंसादोन,सेमरसोत,धाधू,चित्तरपुर और नवाडीह गांवों की कुल 754.14 हेक्टेयर भूमि का उपयोग खनन कार्य में किया जाना है। परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब तीन हजार लोगों को रोजगार मिलने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने सामाजिक दायित्वों का भी निर्वहन कर रही है।विरोध कर रहे लोगों को लेकर कुछ लोगों का दावा था कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे गांवों के लोगों की थी,जो परियोजना से सीधे प्रभावित नहीं हैं। बताया गया कि गेरेंजा,विशुनपुर और मारांगलोइया सहित अन्य गांवों के लोग भी विरोध में शामिल थे,जबकि परियोजना प्रभावित छह गांवों के ग्रामीणों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। हालांकि इस संबंध में ग्रामीणों का पक्ष सामने नहीं आ सका।विरोध के दौरान प्रखंड परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार और पंडाल के दोनों द्वार अवरुद्ध किए जाने से सरकारी कर्मचारियों को भी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में परेशानी हुई। जिला प्रशासन की ओर से जनसुनवाई के लिए प्रतिनियुक्त जिला भू अर्जन पदाधिकारी प्रभात कुमार को भी पंडाल में प्रवेश करने से रोके जाने की बात सामने आई। मौके पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को भी कार्य करने में परेशानी का सामना करना पड़ा।समाचार संकलन के लिए पहुंचे पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना को लेकर पत्रकारों में भी नाराजगी देखी गई।

