रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को लेकर सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जंगल और दुर्गम इलाकों में सक्रिय भारी हथियारों से लैस नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों ने व्यापक अभियान चलाया है। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सल गतिविधियों से जुड़े इलाकों में सघन तलाशी और निगरानी बढ़ाई है।
जंगलों में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन
नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की संयुक्त टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। घने जंगल और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जवानों को ऑपरेशन में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद सुरक्षा बलों ने संवेदनशील इलाकों में अभियान जारी रखा है।
झारखंड में पहले भी सीआरपीएफ की कोबरा इकाइयों ने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लोहरदगा के बुलबुल जंगल क्षेत्र में चलाए गए एक अभियान के दौरान कई मुठभेड़ हुई थीं और हथियार तथा विस्फोटक बरामद किए गए थे।
नक्सली ठिकानों पर बढ़ाई गई निगरानी
सुरक्षा बलों की ओर से नक्सलियों के संभावित ठिकानों और आवाजाही वाले क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। जंगलों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने से नक्सली गतिविधियों पर नजर रखने और उनके नेटवर्क की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है।
अभियान में स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीमें भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों का फोकस नक्सलियों के ठिकानों, हथियारों की सप्लाई और उनके संपर्क तंत्र को कमजोर करने पर है।
आधुनिक तकनीक की भी ली जा रही मदद
नक्सल विरोधी अभियानों में सुरक्षा बल अब पारंपरिक तलाशी के साथ आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। निगरानी, खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण और संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है।
घने जंगलों में अभियान के दौरान सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती नक्सलियों की इलाके की जानकारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होती हैं। ऐसे में अभियान की योजना खुफिया इनपुट और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की जाती है।
झारखंड में लगातार चल रहा नक्सल विरोधी अभियान
झारखंड में सुरक्षा बलों की ओर से नक्सल गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार अभियान चलाए जाते रहे हैं। इन अभियानों में मुठभेड़ के अलावा हथियार और विस्फोटक बरामदगी तथा नक्सलियों की गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी शामिल रही है।
सुरक्षा बलों का अभियान ऐसे इलाकों में भी जारी है, जहां जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
