नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर जोर दिया।
खाड़ी से लेकर लाल सागर तक हमलों पर चिंता
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में कहा कि खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ लाल सागर से काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नागरिकों की भी जान गई है।
भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहनी चाहिए। समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह की हिंसा या अवैध हस्तक्षेप का असर केवल संबंधित जहाजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ता है।
भारत और लाइबेरिया ने शुरू किया नया समूह
समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत और लाइबेरिया ने UNGA के दौरान Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री नाविकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। समूह में भारत और लाइबेरिया के अलावा अन्य साझेदार देश भी शामिल हुए हैं।
इस पहल के जरिए समुद्री मार्गों पर सुरक्षा से जुड़े मुद्दों, नाविकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध व्यापार को लेकर साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर
भारत ने कहा है कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और सुरक्षित आवाजाही अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होनी चाहिए। भारत की UNGA-81 प्राथमिकताओं में भी स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित समुद्री क्षेत्र को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में निर्बाध नौवहन और वाणिज्य तथा नाविकों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।
भारत ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़े एक मंच पर भी कहा था कि वाणिज्यिक जहाजों को भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और संघर्ष वाले क्षेत्रों से नाविकों की सुरक्षित निकासी के लिए प्रभावी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जरूरी है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
भारत का कहना है कि समुद्री मार्गों में असुरक्षा का असर ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति के साथ-साथ माल ढुलाई और बीमा लागत पर भी पड़ सकता है। ऐसे में समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना केवल नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा विषय है।
