देवघर संवाददाता
मोहनपुर थाना क्षेत्र की जीवनदायिनी मानी जाने वाली खरवा नदी इस समय अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। क्षेत्र में बेतहाशा बालू उठाव के कारण नदी के प्राकृतिक स्वरूप पर गहरा असर पड़ा है। हर दिन दर्जनों ट्रैक्टरों के जरिए नदी से बालू निकाली जा रही है।
नदी का बदला भूगोल
अनियंत्रित खुदाई के कारण नदी का तल असमान और काफी गहरा हो गया है, जिससे पानी का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र बदल रहा है। नदी से अंधाधुंध बालू उठाने का सबसे खतरनाक असर अब स्थानीय ग्रामीणों पर दिखने लगा है। बालू न होने के कारण आसपास के गाँवों के कुओं और चापाकलों का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्थिति भीषण पेयजल संकट का रूप ले सकती है। यही नहीं, सिंचाई की व्यवस्था ठप होने से स्थानीय किसानों के सामने संकट खड़ा हो सकता है। बरसात के दिनों में नदी के किनारों के कटाव से किसानों के खेत नदी में विलीन होने का खतरा भी पैदा हो गया है।
सड़कें हुईं जर्जर, ग्रामीण परेशान
बालू लदे ओवरलोडेड ट्रैक्टरों की दिन-रात आवाजाही के कारण ग्रामीण सड़कें टूटने की कगार पर हैं। इन रास्तों पर उड़ने वाली धूल से लोगों को काफी परेशानी हो रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। साथ ही, तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के कारण सड़क दुर्घटनाओं का अंदेशा भी बना रहता है। खरवा नदी से हो रहा यह अत्यधिक दोहन अब सिर्फ पर्यावरण का नुकसान नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी और भविष्य के साथ जुड़ा विषय बन चुका है।
