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देवघर दौरे पर CJI सूर्यकांत, बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद विधिक सेवा शिविर में होंगे शामिल

देवघर दौरे पर CJI सूर्यकांत, बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद विधिक सेवा शिविर में होंगे शामिल

देवघर। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत सोमवार, 2 नवंबर को झारखंड दौरे पर देवघर पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर जिला प्रशासन और न्यायिक अधिकारियों ने सुरक्षा से लेकर यातायात व्यवस्था तक की तैयारियां पूरी कर ली हैं। अपने दौरे के दौरान मुख्य न्यायाधीश बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर में शामिल होंगे।

विधिक सेवा शिविर में जनकल्याणकारी योजनाओं पर रहेगा जोर

देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित होने वाले इस शिविर का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को उनके कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

शिविर में पात्र लाभुकों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने तथा जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता से जोड़ने की पहल की जाएगी।

सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क

मुख्य न्यायाधीश के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा, उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया और पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने कार्यक्रम स्थल की तैयारियों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।

प्रशासन की ओर से मुख्य न्यायाधीश के आवागमन के लिए विशेष रूट चार्ट तैयार किया गया है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और शहर में यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

रांची हाईकोर्ट में डेटा सेंटर का भी करेंगे उद्घाटन

देवघर के कार्यक्रम के बाद जस्टिस सूर्यकांत रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आधुनिक डेटा सेंटर का उद्घाटन प्रस्तावित है। इसके साथ ही हाईकोर्ट की नई वेबसाइट, मोबाइल एप और अन्य डिजिटल न्यायिक सुविधाओं की शुरुआत भी की जाएगी।

इस पहल से झारखंड की न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने और न्यायालयों के कामकाज को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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