कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को गिरफ्तारी वारंट के मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने कृष्णनगर कोर्ट की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को सांसदों और विधायकों के लिए निर्धारित विशेष MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही फिलहाल महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी का खतरा टल गया है।
हाई कोर्ट ने निचली अदालत का आदेश बदला
सोमवार को जस्टिस देबांग्सु बसाक और जस्टिस अर्जय दत्त की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने कृष्णनगर कोर्ट की ओर से जारी गिरफ्तारी वारंट को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई अब सांसदों और विधायकों के लिए नामित विशेष अदालत में की जाए।
हाई कोर्ट के आदेश के तहत मामले को बिधाननगर स्थित न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है।
किस बयान को लेकर दर्ज हुआ था मामला?
यह पूरा मामला महुआ मोइत्रा की एक कथित टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 1 जुलाई को एक मुद्दे पर बोलते हुए महुआ मोइत्रा ने कथित तौर पर कहा था कि अंडे फेंकने के बजाय बुर्का पहनकर अंडे फेंके जाएं, तो शिकायत दर्ज नहीं होगी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस टिप्पणी से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसी शिकायत के आधार पर महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
समन के बाद जारी हुआ था गिरफ्तारी वारंट
अदालत को बताया गया कि निचली अदालत की ओर से महुआ मोइत्रा को कई बार समन भेजा गया था। निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश नहीं होने के बाद 19 अगस्त को उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
हालांकि, महुआ मोइत्रा की ओर से हाई कोर्ट में इस कार्रवाई को चुनौती दी गई। उनके वकील ने दलील दी कि वारंट जारी करने से पहले सांसद को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
वकील ने कहा- 18 अगस्त को अदालत पहुंची थीं महुआ
महुआ मोइत्रा के वकील के मुताबिक, वह 18 अगस्त को निर्धारित सुनवाई के लिए अदालत में मौजूद थीं, लेकिन वकीलों की हड़ताल के कारण उस दिन मामले की सुनवाई नहीं हो सकी।
इसके अगले दिन यानी 19 अगस्त को मामला सुनवाई के लिए आया और उसी दिन उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया। वकील ने हाई कोर्ट में इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया।
MP-MLA कोर्ट में सुनवाई को लेकर उठाया सवाल
महुआ मोइत्रा के वकील ने यह भी दलील दी कि चूंकि वह मौजूदा सांसद हैं, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की सुनवाई सांसदों और विधायकों के लिए निर्धारित विशेष अदालत में होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने इस दलील पर विचार करते हुए गिरफ्तारी वारंट को रद्द कर दिया और मामले को बिधाननगर स्थित MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया।
