पंकज नाथ
असम। असम में मौसमी बाढ़ का संकट अभी भी नियंत्रण से बाहर है। राज्य के कई जिलों में बाजी गई नदियाँ बाढ़ के चलते खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं, जिसके कारण हजारों लोग प्रभावित होकर आश्रय शिविरों में स्थानांतरित हुए हैं और प्रभावित इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जानकारी के अनुसार अबतक करीब 40 से अधिक लोगों की इस बाढ़ से मौत हो चुकी है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों में जलस्तर में तेज वृद्धि देखी गई है और इन जिलों को बाढ़ का सबसे अधिक प्रकोप झेलना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट चुका है और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आवागमन बाधित है। बाढ़ के कारण कृषि भूमि, घर-बार और अन्य सार्वजनिक व निजी सम्पत्ति को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में पेयजल, खाद्य सामग्री और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की भी कमी की जानकारी मिल रही है, जिससे राहत कार्यों की प्राथमिकता बढ़ गई है।प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय बचाव दलों ने नावों के माध्यम से तेज़ रफ्तार से बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ-साथ आश्रय शिविरों में त्वरित निगरानी और तृण-सामग्रियों की आपूर्ति बढ़ा दी गई है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को तात्कालिक स्वास्थ्य जांच, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन और प्राथमिक दवाइयां प्रदान कराई जा रही हैं। स्थानीय प्रशासन ने जनता से सतर्क रहने और निचले इलाकों को खाली करने का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से अनावश्यक संचलन न करने, सरकारी निर्देशों का पालन करने और बचाव दलों के आदेश मानने का आह्वान किया है। यदि स्थिति यथावत बनी रहती है तो संकट और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है, इसलिए बचाव व राहत कार्यों में तीव्रता बरती जा रही है। अधिकारियों ने कहा है कि मौसम विभाग द्वारा जारी की जा रही चेतावनियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और आवश्यकता अनुसार और संसाधन तैनात किए जाएंगे। साथ ही राहत सामग्री और मानव-सहायता के समन्वय के लिए जिला स्तर पर विशेष निगरानी दल सक्रिय किए गए हैं।स्थानीय नागरिक समाज संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं भी राहत कार्यों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। वे प्रभावितों को प्राथमिक जरूरतों के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक सहारा भी उपलब्ध करा रहे हैं। प्रशासन ने प्रभावित लोगों से शांत रहने और आधिकारिक सूचना स्रोतों से ही जानकारी लेने का आग्रह किया है। राज्य सरकार और संबंधित विभाग फिलहाल राहत और पुनर्वास कार्यों पर फोकस कर रहे हैं।

