आदिवासी एक्सप्रेस/लालू कुमार यादव
हुसैनाबाद, पलामू : आज मंगलवार को हुई कुछ घंटों की झमाझम बारिश ने हुसैनाबाद नगर पंचायत के विकास, सफाई व्यवस्था और जलनिकासी के दावों की परतें खोलकर रख दीं। नगर के अधिकांश हिस्से जलमग्न हो गए, सड़कें नालों में तब्दील हो गईं और कई घरों व दुकानों में बारिश का पानी घुस जाने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। नगरवासियों का आरोप है कि हर वर्ष बारिश के साथ यही हालात बनते हैं, लेकिन नगर पंचायत स्थायी समाधान के बजाय केवल दावों और औपचारिकताओं तक सीमित रहती है।
सबसे भयावह स्थिति जेपी चौक से अंबेडकर चौक तक की मुख्य सड़क पर देखने को मिली। बारिश के दौरान और उसके बाद यह पूरी सड़क छोटी नहर का रूप ले चुकी थी। सड़क पर तेज बहाव के साथ गंदा पानी और कीचड़ जमा होने से लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। दोपहिया वाहन चालक फिसलने के डर से सहमे रहे, जबकि राहगीरों को पानी में उतरकर आवागमन करना पड़ा।
इस जलभराव का सबसे अधिक असर सड़क किनारे रोजी-रोटी कमाने वाले सब्जी विक्रेताओं पर पड़ा। नगर पंचायत को नियमित टैक्स देने के बावजूद उनके लिए आज तक कोई शेडयुक्त सब्जी बाजार उपलब्ध नहीं कराया गया है। मजबूरी में उन्हें बदबूदार कीचड़, नालियों के गंदे पानी और लगातार बहते जल के बीच ही सब्जियां बेचनी पड़ीं। कई विक्रेताओं ने बताया कि पानी में भीगने और कीचड़ से सामान खराब होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
नगर पंचायत के लगभग सभी 16 वार्डों में जलनिकासी व्यवस्था की पोल खुल गई। अधिकांश स्थानों पर नालियां जाम मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों और गलियों में फैल गया। कई मोहल्लों में लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुसने से घरेलू सामान तथा व्यापारिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा। गंदे पानी के जमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा नालियों की नियमित सफाई और जलनिकासी के दावे धरातल पर दिखाई नहीं देते। लोगों का कहना है कि यदि समय पर नालियों की प्रभावी सफाई और जल निकासी की समुचित व्यवस्था की गई होती तो नगर को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। उनका आरोप है कि सफाई अभियान का अधिक जोर प्रचार-प्रसार पर दिखता है, जबकि वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
नगरवासियों का यह भी कहना है कि हर वर्ष मानसून में यही स्थिति बनती है, लेकिन जलभराव वाले क्षेत्रों के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस योजना लागू नहीं की जाती। परिणामस्वरूप थोड़ी सी बारिश भी पूरे नगर की व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर देती है।इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि सफाईकर्मी लगातार नालियों की सफाई में लगे हुए हैं और जहां जलभराव की सूचना मिल रही है, वहां आवश्यक कार्रवाई कराई जा रही है। हालांकि नगरवासियों द्वारा उठाए गए जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था और बार-बार होने वाले जलभराव के सवाल पर उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
इधर, लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से जाम नालियों की तत्काल सफाई, जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए स्थायी ड्रेनेज योजना लागू करने तथा टैक्स देने वाले सब्जी विक्रेताओं के लिए शीघ्र शेडयुक्त बाजार उपलब्ध कराने की मांग की है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि कुछ फेसबुकिया लोगों का कहना है कि हुसैनाबाद में यह स्थिति पहले से ही है। पहले हुसैनाबाद लंदन नहीं था। शायद उन्हें यह नहीं पता है कि व्यवस्था परिवर्तन के लिए ही आम मतदाता सत्ता परिवर्तन करती है। अगर सबकुछ वैसा ही रहेगा तो फिर आखिर सत्ता परिवर्तन क्यों? एक पुरानी कहावत है कि नाली का कीड़ा नाली में ही रहना पसंद करता है।
बारिश ने बहा दिए विकास के दावे, हुसैनाबाद की मुख्य सड़क बनी ‘छोटी नहर’, गंदे पानी में सब्जी बेचने को मजबूर विक्रेता
