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फ़्रांस की अनुदान राशि के दुरुपयोग का आरोप। APFBC परियोजना में IFS अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप ।

फ़्रांस की अनुदान राशि के दुरुपयोग का आरोप। APFBC परियोजना में IFS अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप ।

पंकज नाथ, असम, आदिवासी एक्सप्रेस :

असम सरकार के वन विभाग के अंतर्गत फ्रांस की अनुदान निधि से चल रहे “Assam Project on Forest and Biodiversity Conservation Society (APFBC)” परियोजना में मिली जानकारी और आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर कई स्थानों पर अवैध आवंटन और धनराशि के गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि 2021 में तेज़पुर में करीब 36 करोड़, शिलचर में करीब 12 करोड़ , बोंगाइगाँव में करीब 16 करोड़ , जोरहाट में करीब 22 करोड़ , कोकराझार में करीब 16 करोड़ और हाफलॉन्ग ज़िलों में करीब 34 करोड़ रुपये की पौधारोपण और चहेरा-फेंसिंग के ठेके दिए गए। ठेकेदारों में M/s Badri Rai & Company (Duliajaan), M/s Gramin Vikas Trust (Uttar Pradesh) और M/s Sarada Project Limited (Hyderabad) प्रमुख हैं। इन ठेकों के कुल अनुबंध मूल्य करोड़ों में रहे और ठेकेदारों को अनेक प्रथम किस्तें जारी की गईं, जबकि उस समय वन विभाग में किसी भी ठेकेदार द्वारा प्रत्यक्ष पौधारोपण की स्पष्ट नियमावली मौजूद नहीं थी।आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार APFBC सोसाइटी के परियोजना निदेशक KSPV पवन कुमार, IFS पर अपने पसंदीदा ठेकेदारों के साथ मिलकर सार्वजनिक धन का बड़ा हिस्सा ग़ैरकानूनी रूप से हड़पने का आरोप है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदारों को प्रथम किस्तें तभी जारी कर दी गईं जब वे परियोजना निदेशक के “समझौते” पर सहमत थे। पत्रकारों द्वारा Badri Ray & Company के काम की रिपोर्टिंग के बाद इस ठेकेदार ने शिकायत दर्ज करवाई और शिकायत संख्या 1964/2022 के तहत अभियोग चलाया गया। शिकायत में यह भी आरोप था कि रिपोर्टर ने फेंसिंग सामग्री चुरा ली। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने ठेकेदार के कोई ठोस साक्ष्य न होने के कारण रिपोर्टर को बरी कर दिया; अदालत ने 06/02/2026 को रिपोर्टर को निर्दोष करार दिया। सुनवाई के दौरान अभियोजक पक्ष कई दिनों पर उपस्थित नहीं रहा और कोई निर्णायक प्रमाण नहीं दे पाया। साथ ही एक और गंभीर प्रकरण में APFBC के फंड से 05/04/2023 को 129 वाहन खरीदने की स्वीकृति दी गई थी। आरटीआई व जांच के दस्तावेज़ बताते हैं कि इन वाहनों की खरीद का अनुबंध केरल की एक कंपनी S.B.L. Knowledge Services Pvt. Ltd. से लगभग ₹10.94 करोड़ की संदिग्ध कागज़ात के आधार पर कर दिया गया था। इस खरीद में भी वर्तमान में जांच जारी है और खरीद संबंधी अनियमितताओं की फ़ौरन जांच की मांग उठी है। इन आरोपों के बीच पवन कुमार, IFS को वर्तमान में PCCF (Wildlife) पद के लिए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में अपील दायर करते हुए देखा जा रहा है। स्थानीय आरटीआई कार्यकर्ता दिलीप नाथ ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को अनुरोध करते हुए कहा है कि ऐसे अधिकारी को किसी भी तरह से वन्यजीव विभाग के PCCF पद पर नियुक्ति न दी जाए जब तक इसके ऊपर चल रही जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित न हो। मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और शीघ्र जांच की मांग उठ रही है ताकि विदेशी अनुदान के दुरुपयोग और सार्वजनिक धन के संभावित हेराफेरी का स्पष्ट विवेचन हो सके।

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