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नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही शिकारीपाड़ा की पत्थर खदान, सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बड़े हादसे की आशंका।

नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही शिकारीपाड़ा की पत्थर खदान, सुरक्षा मानकों की अनदेखी से बड़े हादसे की आशंका।

शिकारीपाड़ा/ दुमका/

आदिवासी एक्सप्रेस।

दुमका जिले के शिकारीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मंझलाडीह में दीपक कुमार सिंह और जोसा किस्कू के नाम से संचालित एक पत्थर खदान में इन दिनों नियमों की धज्जियां उड़ाकर धड़ल्ले से काम किया जा रहा है। इस खदान में सुरक्षा और पर्यावरण मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। धरातल पर देखा जाए तो खदान के चारों ओर सुरक्षा के लिहाज से कोई घेराबंदी (फेंसिंग) नहीं की गई है, जिसके कारण स्थानीय मवेशियों और राहगीरों के गहरे गड्ढों में गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण को लेकर दिए गए एनजीटी के निर्देशों की अनदेखी करते हुए खदान क्षेत्र में कहीं भी पौधारोपण नहीं किया गया है, जिससे इलाके में प्रदूषण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति खदान में काम करने वाले मजदूरों की है, जो बिना किसी सुरक्षा उपकरण (जैसे हेलमेट, बूट या बेल्ट) के अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना काम करने को मजबूर हैं। खदान प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण मजदूरों के साथ कभी भी कोई अप्रिय घटना या जानलेवा दुर्घटना घट सकती है। नियमों का उल्लंघन यहीं नहीं थमता, बल्कि खदान से पत्थरों के परिवहन में भी भारी मनमानी की जा रही है। खदान से जितने मात्रा में खनन करना है उससे अधिक मात्रा में खनन किया जा रहा है।परिवहन नियमों को दरकिनार कर हाईवा वाहनों में क्षमता से अधिक भारी-भरकम बोल्डर लादकर खदान से बाहर निकाला जा रहा है। ओवरलोडेड वाहनों के परिचालन से न सिर्फ सड़कें समय से पहले जर्जर हो रही हैं, बल्कि मुख्य मार्गों पर चलने वाले अन्य राहगीरों की जान पर भी हर वक्त खतरा मंडराता रहता है। स्थानीय प्रशासन की चुप्पी के कारण खदान संचालकों के हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम नियमों का माखौल उड़ा रहे हैं। इस संबंध में जब जिला खनन पदाधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी।

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