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गोहपारू शराब दुकान मे प्रिंट से अधिक मे बेची जा रही शराब आबकारी विभाग मौन

गोहपारू शराब दुकान मे प्रिंट से अधिक मे बेची जा रही शराब आबकारी विभाग मौन

शहडोल से राजेश कुमार यादव

शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र अंतर्गत गोहपारू मे संचालित शराब दुकान इन दिनों भ्रष्टाचार और दबंगई का अड्डा बन चुकी है यहाँ आबकारी विभाग के नियमों को पैरों तले रौंदते हुए ग्राहकों से सरेआम लूट की जा रही है ताज्जुब की बात यह है कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और लगातार शिकायतों के बावजूद आबकारी विभाग ‘कुंभकर्णी नींद’ में सोया हुआ है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं

“महंगा ठेका” बना लूट का लाइसेंस

दुकान पर तैनात कर्मचारी निर्भीकता के साथ स्वीकार कर रहे हैं कि वे ओवररेटिंग कर रहे हैं। जब जागरूक नागरिकों ने इसका विरोध किया, तो कर्मचारियों ने बेतुका तर्क देते हुए कहा- “इस साल ठेका बहुत महंगा हुआ है, शासन को ज्यादा पैसा दिया है, तो हम वसूली भी ज्यादा करेंगे।” सवाल यह उठता है कि क्या आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को अपनी मर्जी से दाम तय करने की मौखिक छूट दे रखी है

विरोध करने पर ‘जान से मारने की धमकी’

लूट का यह खेल केवल पैसों तक सीमित नहीं है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि यदि कोई ग्राहक रसीद मांगता है या प्रिंट रेट (MRP) पर शराब देने का आग्रह करता है, तो दुकान के कर्मचारी गोलबंद होकर उसे धमकाने लगते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि यहाँ कर्मचारियों के वेश में ‘दबंग’ पाले गए हैं, जो विरोध की आवाज को दबाने के लिए गाली-गलौज और मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।

आबकारी विभाग की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी

हैरानी की बात है कि गोहपारू की जनता चिल्ला-चिल्ला कर इस अवैध वसूली की गवाही दे रही है, वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, लेकिन आबकारी विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाँच करने की जहमत नहीं उठा रहा है। विभाग की यह चुप्पी क्या इस बात का संकेत है कि “ऊपर तक हिस्सा” पहुँच रहा है आखिर क्यों दोषियों पर FIR दर्ज नहीं की जा रही और क्यों दुकान का लाइसेंस सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई?

कानून का मखौल उड़ाते सेल्समैन

नियमों के अनुसार, हर शराब दुकान पर रेट लिस्ट चस्पा होना अनिवार्य है और MRP से एक रुपया भी अधिक लेना संगीन अपराध है। लेकिन गोहपारू में ठेकेदार के रसूख के आगे कानून बौना नजर आ रहा है। यहाँ शासन के राजस्व की नहीं, बल्कि ठेकेदार के मुनाफे की चिंता की जा रही है।

जनता की चेतावनी: “कार्रवाई नहीं तो आंदोलन”

गोहपारू के स्थानीय निवासियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि 24 घंटे के भीतर आबकारी विभाग ने इस दुकान पर छापा मारकर कार्रवाई नहीं की और धमकी देने वाले कर्मचारियों को नहीं हटाया, तो वे जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे और उग्र आंदोलन करेंगे

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