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असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए पवन खेड़ा का आवेदन दायर । रिनिकी भुइंया शर्मा के मानहानि मामले में नया मोड़।

असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए पवन खेड़ा का आवेदन दायर । रिनिकी भुइंया शर्मा के मानहानि मामले में नया मोड़।

पंकज नाथ, असम, आदिवासी एक्सप्रेस :

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइंया शर्मा द्वारा दर्ज मानहानि मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट में सोमवार को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया है। बता दें कि, असम विधानसभा चुनाव से पहले पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिनिकी भुइंया शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मिस्र और एंटीग्वा-बारबुडा के पासपोर्ट हैं, साथ ही 2021-22 में विदेशी नागरिकता प्राप्त की। खेड़ा ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी की विदेशी संपत्ति का चुनावी हलफनामे में जिक्र नहीं किया। मुख्यमंत्री सरमा और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये दावे AI-जनरेटेड हैं और एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल से उत्पन्न हुए। इसके बाद रिनिकी भुइंया शर्मा ने खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि के दो मामले दर्ज कराए। सुप्रीम कोर्ट और अन्य कोर्ट के फैसलेसबसे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को पवन खेड़ा को सीमित ‘ट्रांजिट’ अग्रिम जमानत दी थी। लेकिन असम सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्थगित कर दिया। जस्टिस जेके माहेश्वरी और अतुल सच्चंदुरकर की बेंच ने खेड़ा की अंतरिम सुरक्षा याचिका खारिज करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। इससे पहले गुवाहाटी के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 7 अप्रैल को असम पुलिस की जमानतबिना गिरफ्तारी वारंट की मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध बेलेबल होने पर भी पुलिस को वारंट के बिना गिरफ्तारी का अधिकार है, इसलिए अभी इसकी जरूरत नहीं। अब सभी की नजरें गुवाहाटी हाईकोर्ट पर हैं, जहां पवन खेड़ा का अग्रिम जमानत आवेदन लंबित है। असम पुलिस ने खेड़ा पर धोखाधड़ी, बदनामी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए हैं। यह मामला असम की राजनीति में तनाव बढ़ा रहा है, खासकर विधानसभा चुनावों के बाद। कांग्रेस नेता ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि भाजपा इसे कानूनी कार्रवाई करार दे रही है। कोर्ट का फैसला राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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