पीड़िता के पति से मांगे 5 हजार रुपए, नहीं देने पर केस खत्म कराने की दी धमकी
-आदिवासी एक्सप्रेस फुल्लीडुमर बांका
-मारपीट की शिकार महिला ने न्याय के लिए लगाई गुहार, प्राथमिकी दर्ज होने के बाद साइबर ठगों ने बनाया निशाना; थानाध्यक्ष बोले—ऑनलाइन सूचना का उठा रहे हैं गलत फायदा
बांका। बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड अंतर्गत फुल्लीडुमर पंचायत के उर्दवारी गांव, वार्ड संख्या-8 की रहने वाली कूंती देवी के साथ मारपीट के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एफआईआर दर्ज होते ही अज्ञात साइबर ठगों ने उनके मोबाइल पर फोन कर रुपये की मांग शुरू कर दी और केस खत्म कराने तथा आरोपी को जेल भेजने के नाम पर ठगी का प्रयास किया।
जानकारी के अनुसार, गत 3 जुलाई को मवेशी चराने को लेकर हुए विवाद में पड़ोसी द्वारा कूंती देवी के साथ कथित रूप से मारपीट की गई थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इसके बाद 4 जुलाई को उन्होंने फुल्लीडुमर थाना में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता का आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद उन्हें पूरे दिन थाना में बैठाए रखा गया और सादे कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया। बाद में मामला मीडिया में आने के पश्चात पुलिस हरकत में आई और उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने के अगले दिन, 5 जुलाई की शाम लगभग तीन बजे से लगातार अलग-अलग मोबाइल नंबर 8463088091, 8982606334 एवं 6389851615 से उनके पति धनेश्वर यादव के मोबाइल 9572615382 पर फोन आने लगे। कॉल करने वालों ने स्वयं को प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए कहा कि “आपके खिलाफ वारंट निकल गया है। यदि पांच हजार रुपये दे देंगे तो प्राथमिकी के नामजद अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा, अन्यथा आपका केस ही खत्म कर दिया जाएगा।”
इस घटना से पीड़ित परिवार दहशत में है। उनका कहना है कि न्याय की उम्मीद लेकर थाना पहुंचे थे, लेकिन अब साइबर ठगों की धमकियों से मानसिक रूप से परेशान हैं।
इधर, इस संबंध में फुल्लीडुमर थानाध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में प्राथमिकी दर्ज होने की प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है। ऐसे में एफआईआर में दर्ज मोबाइल नंबर विभिन्न माध्यमों से साइबर अपराधियों की नजर में आ जाते हैं। इसी का दुरुपयोग करते हुए ठग पुलिस या न्यायालय का नाम लेकर लोगों से रुपये ऐंठने का प्रयास करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी मामले में फोन कर रुपये की मांग नहीं करती है। यदि किसी के पास इस प्रकार का कॉल आए तो वह किसी भी कीमत पर पैसे न दें, बल्कि तत्काल स्थानीय थाना या साइबर हेल्पलाइन को इसकी सूचना दें।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अब अपराधी केवल सड़क या गांव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया में शामिल लोगों को भी साइबर ठगी का निशाना बना रहे हैं। ऐसे में आम लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध फोन कॉल पर विश्वास न करने की आवश्यकता है।
एफआईआर दर्ज होते ही शुरू हुआ ‘वारंट’ के नाम पर ठगी का खेल!
