छोटी मछली ज्यादा लजीज व किफायती के साथ ही पौष्टिक कारक माना जाता है।
क्योंकि इसमें विभिन्न तरह के विटामिनों का खजाना मिलता है जिसमें प्रमुख रूप से विटामिन डी है जो हड्डियों एवं दांतों के मजबूती के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा देती है जबकि विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण एवं तंत्रिकाओं यानी नर्वस सिस्टम को दुरुस्त रखने में मदद करता है हालांकि यह गुण नदी तालाब में पाए जाने वाली मछलियों के अपेक्षा समुद्री मछली इसका बेहतर स्रोत माना जाता है।
विटामिन बी12 के अलावे मछली में विटामिन बी6 मौजूद है जो भोजन के ऊर्जा में बदलने एवं मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखने में सहायक होता है चुकी मछली में कार्बोहाइड्रेट और विटामिन सी ना के बराबर होता है बावजूद इसके इसमें प्रोटीन सेलेनियम और जिंक का अद्भुत संगम के चलते यह पोस्टिक कारक खाद्य पदार्थों में शुमार है मछली में ओमेगा 3 यानी फैटी एसिड दिल और दिमाग को सक्रिय करने का जबरदस्त साधन के रूप में उपलब्ध है जिस चिकित्सक सप्ताह में काम से कम दो बार मछली खाने की सलाह देते हैं ताकि तनाव आदि से निजात मिल सके।
मछली में विटामिन ए होने के कारण यह आंखों की रोशनी के लिए काफी गुणकारी एवं त्वचा को स्वस्थ रखने में कारगर होती है ।
छोटी मछली वीर्य वर्धक एवं स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है इतना ही नहीं यह बड़ी मछलियों से कीमत में भी काफी काम में बाजार में उपलब्ध होती है।
बड़ी मछली डेढ़ से दो सौ रुपए किलो बाजार में बिकती है तो छोटी मछलियां 80 से ₹100 प्रति किलो बाजार में उपलब्ध होती है और यह खाने में भी काफी लजीज होती है।
अलबत्ता मछली खरीदते समय इसके ताजा होने का प्रमाणित होना चाहिए जिसकी पहचान इसके गलफड़ को रत रत लाल रहने के साथ ही मछली के शरीर को गला एवं सरे और बदबूदार नहीं होना चाहिए।
छोटी मछली ज्यादा लज़ीज़ व किफायती के साथ पौष्टिकारकलखीसराय ( कजरा)डॉ आर लाल गुप्ता,वरिष्ठ पत्रकार
