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जमुआ का लाल बना अफसर, रवि शंकर ने 70वीं बीपीएससी की परीक्षा में पाई सफलता, बनेंगे ग्रामीण विकास पदाधिकारी

जमुआ का लाल बना अफसर, रवि शंकर ने 70वीं बीपीएससी की परीक्षा में पाई सफलता, बनेंगे ग्रामीण विकास पदाधिकारी

हौसलों से हासिल की मंजिल: जमुआ के रवि शंकर बने ग्रामीण विकास पदाधिकारी, 70वीं बीपीएससी में चमका नाम

​गिरिडीह। कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को जमुआ प्रखंड के परगोडीह निवासी सुरंजन सिंह के पुत्र रवि शंकर ने सच कर दिखाया है। रवि शंकर ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए 466वीं रैंक प्राप्त की है। उनका चयन ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) के पद पर हुआ है। रवि की इस कामयाबी से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे प्रखंड और जिले में हर्ष का माहौल है। बधाई देने वालों का उनके घर पर तांता लगा हुआ है।

शुरू से ही मेधावी छात्र

​रवि शंकर की प्रारंभिक शिक्षा संत अरबिंदो कॉन्वेंट मिर्जागंज से हुई। इसके बाद उन्होंने डीएवी हेहल, रांची से इंटर और फिर बेंगलुरु से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री पूरी की। रवि बचपन से ही मेधावी रहे हैं और इससे पहले भी उन्होंने यूपीएससी, बीपीएससी और जेपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं के प्री और मेंस स्तर तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा साबित की थी। अपनी तैयारी को धार देने के लिए उन्होंने दिल्ली और पटना में रहकर कोचिंग ली और आखिरकार अपने लक्ष्य को भेद दिया। पिछले सात आठ सालों की कड़ी मेहनत से मिली सफलता।

​यह मेरी नहीं, पूरे परिवार के त्याग की जीत है: रवि शंकर

रवि शंकर ने कहा कि यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत, निरंतरता आगे बढ़ने का संकल्प है। जब आप यूपीएससी या बीपीएससी जैसी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, तो धैर्य सबसे बड़ा हथियार होता है। मैंने दिल्ली और पटना में रहकर पढ़ाई की, कई बार असफलताओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरी इस सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता और गुरुजनों को जाता है, जिन्होंने हर परिस्थिति में मेरा हौसला बढ़ाया।

बेटे की मेहनत रंग लाई : सुरंजन सिंह

​ समाजसेवी सुरंजन सिंह अपने बेटे की इस कामयाबी पर भावुक और गौरवान्वित दिखे। उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती कि उसका बेटा अपनी मेहनत के दम पर इतने ऊंचे पद पर पहुंचे। रवि बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर और अनुशासित रहा है। उसने दिन-रात एक करके यह मुकाम हासिल किया है। दिल्ली और पटना में रहकर जब वह पढ़ाई कर रहा था, तब भी हमें उसकी लगन पर पूरा भरोसा था। आज उसकी इस उपलब्धि ने हमारे पूरे परिवार, रिश्तेदारों और हमारे गांव परगोडीह का नाम रोशन कर दिया है।

बधाई देने वालों का तांता

रवि शंकर की इस उपलब्धि पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों, समाजसेवियों और शुभचिंतकों ने उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। युवाओं के बीच उनकी यह सफलता चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह साबित करती है की दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी ऊंचे मुकाम को हासिल किया जा सकता है।

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