गिरिडीह। कागजों पर दौड़ते स्वच्छता अभियान और जमीनी हकीकत के बीच का फासला देखना हो, तो जमुआ चौक चले आइए। यहाँ करोड़ों के बजट वाले ‘स्वच्छ भारत’ के दावों की धज्जियाँ उड़ती साफ देखी जा सकती हैं। स्थिति यह है कि जमुआ चौक का मुख्य गोलंबर अब ‘अघोषित कचरा पॉइंट’ बन चुका है। कोडरमा रोड समेत चौक के चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ कूड़े के पहाड़ नजर आ रहे हैं। खूबसूरती पर कचरे का ग्रहण: डिवाइडर बने कूड़ेदान प्रशासन ने जिस चौक और डिवाइडर को इलाके के सौंदर्यीकरण के लिए बनवाया था, आज लोग उसी डिवाइडर के बीच में कचरा फेंक रहे हैं। डस्टबिन की अनुपलब्धता के कारण आम राहगीर और दुकानदार सड़क के बीचो-बीच कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। नतीजा यह है कि सड़कें संकरी हो रही हैं और हर वक्त बड़ी दुर्घटना का साया मंडराता रहता है।
दुकानों के आगे बजबजाती नालियां, ग्राहकों ने मोड़ा मुंह
चौक के चारों तरफ की नालियां पूरी तरह जाम हो चुकी हैं। सड़ांध मारते पानी और बजबजाती गंदगी के कारण स्थानीय दुकानदारों का जीना मुहाल है। व्यापारियों का कहना है कि दुकान के आगे इतनी तेज दुर्गंध रहती है कि ग्राहक रुकना तो दूर, यहाँ से तेजी से भाग जाना चाहते हैं। इस गंदगी ने हमारा व्यापार चौपट कर दिया है। स्थानीय जनता का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पूरे क्षेत्र का कचरा ठिकाने लगाने के लिए कोई स्थायी डंपिंग यार्ड क्यों नहीं बनाया गया, कचरा उठाने की कोई नियमित चेन नहीं होने से पूरी आबादी नरकीय जीवन जीने को विवश है। बारिश के मौसम में यह समस्या महामारी का रूप ले सकती है।
व्यापारियों और नागरिकों की प्रशासन को दोटूक
स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध व्यवसायियों ने जिला प्रशासन से आर-पार की मांग की है। जमुआ चौक पर तत्काल विशेष सफाई अभियान चलाकर कचरा हटाया जाए। मुख्य जगहों पर बड़े डस्टबिन (कूड़ेदान) रखे जाएं। कचरा निस्तारण के लिए अविलंब एक स्थायी डंपिंग यार्ड चिन्हित किया जाए। अगर प्रशासन ने जल्द ही इस सुध नहीं ली, तो स्थानीय लोग आंदोलन को बाध्य होंगे।
