नई दिल्ली: आमतौर पर लोग अच्छी शिक्षा हासिल करने के बाद बेहतर नौकरी, अच्छी सैलरी और सफल करियर का सपना देखते हैं। लेकिन कुछ लोग जिंदगी में ऐसा रास्ता चुनते हैं, जो दूसरों के लिए हैरान करने वाला होता है। इन दिनों ऐसे ही एक शख्स की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिन्होंने कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, मुंबई स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में ट्रेनिंग ली और वहां काम भी किया। इसके बाद उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास का रास्ता अपना लिया। अब वह गंगोत्री की पहाड़ियों में साधु के रूप में रह रहे हैं।
2002 में की थी कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह शख्स अपनी पढ़ाई और पुराने करियर के बारे में बताते नजर आते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में उन्होंने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया था। इसके बाद मुंबई स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में करीब छह महीने की ट्रेनिंग ली और वहां काम भी किया।
उन्होंने आगे एमटेक की पढ़ाई पूरी की। तकनीकी शिक्षा और प्रतिष्ठित संस्थान में काम करने का अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी की दिशा बदलने का फैसला किया। वह संन्यासियों के साथ रहने चले गए और आध्यात्मिक जीवन अपनाया।
नौकरी छोड़ने पर पूर्व बॉस ने पूछा- क्या तुम पागल हो गए हो?
वीडियो में साधु अपने पुराने दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाते हैं। उनके मुताबिक, जब उन्होंने नौकरी छोड़कर संन्यासियों के साथ रहने का फैसला किया, तो उनके पुराने बॉस को यह बात समझ नहीं आई।
जब बॉस को पता चला कि वह पहाड़ों में साधुओं के साथ रह रहे हैं, तो उन्होंने हैरानी से पूछा, ‘क्या तुम पागल हो गए हो?’
इस घटना का जिक्र करते हुए साधु मुस्कुराते नजर आते हैं। उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा है। कई लोग उनके फैसले और जिंदगी के प्रति नजरिए पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, उनके पुराने पद और वेतन से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
‘जन्म और मृत्यु के बीच का समय ही असली जिंदगी’
इस कहानी का सबसे खास हिस्सा वह विचार है, जिसके जरिए साधु अपने जीवन को देखने का नजरिया बताते हैं। वीडियो में वह कहते हैं कि इंसान के लिए जन्म और मृत्यु के बीच मिलने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण है।
उनके मुताबिक, लोग अक्सर बड़ी पोस्ट, पैसे और करियर की दौड़ में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि जिंदगी के असली महत्व को समझना भूल जाते हैं। जबकि जन्म और मृत्यु के बीच मिलने वाला सीमित समय ही हमारी असली जिंदगी है। इसलिए इस समय को पहचानना और इसका सही इस्तेमाल करना जरूरी है।
उनकी बातों का संदेश है कि जिंदगी का मूल्य केवल नौकरी, पद या कमाई से तय नहीं होता। हर व्यक्ति को यह समझने की जरूरत है कि उसके लिए वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कहानी
गंगोत्री की पहाड़ियों में रह रहे इस साधु का वीडियो कंटेंट क्रिएटर मोहित पवार के इंस्टाग्राम अकाउंट से सामने आया। वीडियो में साधु अपनी पढ़ाई, BARC में काम करने और संन्यास लेने के फैसले के बारे में सहजता से बात करते दिखाई देते हैं।
उनकी कहानी लोगों को इसलिए भी आकर्षित कर रही है, क्योंकि इसमें एक ओर तकनीकी शिक्षा और करियर का अनुभव है, तो दूसरी ओर सांसारिक जीवन से अलग आध्यात्मिक रास्ता चुनने का फैसला।
हालांकि, किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़ा फैसला हर किसी के लिए एक जैसा नहीं हो सकता। यह कहानी इस बात पर विचार करने का अवसर जरूर देती है कि सफलता का अर्थ केवल अच्छी नौकरी और पैसा ही है या फिर अपनी पसंद और संतुष्टि के अनुसार जीवन जीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
