तिरुवनंतपुरम। केरल के नए राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर के लोक भवन की रसोई में केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने के कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे व्यक्तिगत खान-पान की पसंद से जुड़ा मामला बताया है। वहीं, राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था राज्यपाल के निजी भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई तक सीमित है। लोक भवन के कर्मचारियों के खान-पान पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर ने 23 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद लोक भवन की रसोई में मांसाहारी भोजन नहीं बनाने और केवल शाकाहारी भोजन तैयार करने का निर्देश दिया था। इस पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की निजी पसंद को दूसरों पर थोपना उचित नहीं है।
कांग्रेस ने खान-पान की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कथित निर्देश की आलोचना करते हुए कहा कि केरल की खान-पान संस्कृति विविधतापूर्ण है। तटीय राज्य होने के कारण यहां मछली और अन्य मांसाहारी व्यंजन लोगों के भोजन का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में लोगों की पारंपरिक खान-पान की आदतों को सीमित करने का कोई भी प्रयास स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि यह कदम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार की विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। उन्होंने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोगों की जीवनशैली से जुड़ा मुद्दा बताया।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि राज्यपाल को अपनी पसंद के अनुसार शाकाहारी भोजन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उनकी निजी पसंद के आधार पर दूसरे लोगों के खान-पान के विकल्प सीमित नहीं किए जाने चाहिए।
लोक भवन ने दी सफाई, कर्मचारियों पर कोई रोक नहीं
विवाद बढ़ने के बाद राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर शाकाहारी हैं और उनके भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाली रसोई में मांसाहारी भोजन तैयार नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि लोक भवन की इस रसोई में तैयार भोजन मुख्य रूप से राज्यपाल और उनके निजी स्टाफ के कुछ सदस्यों को परोसा जाता है। अन्य कर्मचारी या तो घर से खाना लाते हैं या बाहर भोजन करते हैं। उनके शाकाहारी या मांसाहारी भोजन करने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
लोक भवन के सूत्रों के मुताबिक, पूर्व के कुछ राज्यपालों के कार्यकाल में इसी रसोई में मछली और मांस के व्यंजन भी तैयार किए जाते थे। इस स्पष्टीकरण के बाद विवाद का प्रमुख सवाल यह बन गया है कि निर्देश का दायरा कितना है और क्या इसे किसी व्यापक प्रतिबंध के रूप में देखा जाना चाहिए।
CPI(M) ने भी जताई आपत्ति
केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे से जुड़ी CPI(M) ने भी कथित निर्देश की आलोचना की। पार्टी के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि क्या खाना है, यह तय करना व्यक्ति का निजी अधिकार है। राज्यपाल अपनी पसंद से शाकाहारी भोजन कर सकते हैं, लेकिन यह पसंद दूसरों पर लागू नहीं की जानी चाहिए।
गोविंदन ने आरोप लगाया कि खान-पान जैसे व्यक्तिगत विषय को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश में लोगों को अपनी पसंद का भोजन चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
कांग्रेस और CPI(M) दोनों ने इस मामले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और केरल की पारंपरिक खान-पान संस्कृति से जोड़कर देखा है। हालांकि, लोक भवन के सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों के भोजन विकल्पों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नए राज्यपाल के कार्यभार संभालते ही शुरू हुआ विवाद
ओम प्रकाश माथुर ने 23 अक्टूबर 2026 को केरल के 29वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन ने तिरुवनंतपुरम स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई। उन्होंने राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का स्थान लिया, जिन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
पदभार संभालने के तुरंत बाद खान-पान संबंधी कथित निर्देश को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। यह विवाद अब व्यक्तिगत भोजन पसंद, संस्थागत व्यवस्था और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की भूमिका को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शाकाहारी भोजन संबंधी निर्देश राज्यपाल के निजी भोजन की रसोई तक सीमित बताया गया है। कर्मचारियों पर किसी प्रतिबंध की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए पूरे लोक भवन में मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने का दावा करना सही नहीं होगा।
