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फर्जी कमेटी का खेल टेरर मॉडल, चंद्रगुप्त माइंस में हाइवा से 100रुपये प्रति टन तक की अवैध वसूली का मामला

फर्जी कमेटी का खेल टेरर मॉडल, चंद्रगुप्त माइंस में हाइवा से 100रुपये प्रति टन तक की अवैध वसूली का मामला

उच्चस्तरीय जांच में खुलेंगे कई राज, सीसीएल चंद्रगुप्त प्रोजेक्ट बना अवैध उगाही का अड्डा।
आदिवासी एक्सप्रेस संवाददाता- अबुल कलाम
चतरा- (हजारीबाग)
के दो जिलों के बीच सेन्ट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र अंतर्गत संचालित केरेडारी प्रखंड में चंद्रगुप्त परियोजना में इन दिनों असामाजिक तत्वों का दबदबा और अवैध उगाही का खेल अपने चरम पर है। स्थानीय ग्रामीणों और ट्रांसपोर्टरों की नाक में दम करते हुए कुछ असमाजिक तत्वों ने फर्जी समितियों का गठन कर रंगदारी और अवैध वसूली का एक बड़ा तंत्र खड़ा कर लिया है। टेरर फंडिंग की तर्ज पर चलाए जा रहे इस अवैध साम्राज्य के खिलाफ अब ग्रामीण और भुक्तभोगियों ने मोर्चा खोल दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीएल महाप्रबंधक को सौंपे गए शिकायत पत्र के अनुसार, असामाजिक तत्वों ने क्षेत्र के हजारीबाग जिले में पचड़ा, सिझुआ, चट्टी- बरियातू, बुकरू, भादेखाप, नावाखाप, जोरदाग एवं चतरा जिले के टंडवा प्रखंड में उड़सू जैसे निर्दोष गांवों के नाम का दुरुपयोग करते हुए फर्जी कमेटियां बना ली है। इन कमेटियों की आड़ में चंद्रगुप्त परियोजना में कोयला ढुलाई के लिए आने-जाने वाले ट्रकों और हाइवा वाहनों से जबरन भारी-भरकम राशि की वसूली की जा रही है। ​वसूली की तय दरें खुद फर्जी समिति तय करती है। आम्रपाली-चंद्रगुप्त परियोजना की नियम एक है लेकिन ​जहां आम्रपाली परियोजना में लोडर का वास्तविक लोडिंग शुल्क मात्र 900 रुपये निर्धारित है, वहीं चंद्रगुप्त परियोजना में लोडिंग के नाम पर मनमाने ढंग से ट्रक ड्राइवरों से डरा-धमका कर लिया जा रहा, फर्जी कमेटी के लोगों ने चंद्रगुप्त परियोजना के शुशी इंफ्रा कैम्प के कोयला स्टॉक आड़ में लोडर से लोडिंग के नाम पर रक़म की वसूली के लिए कुछ अपराधी तत्वों के लोगों को डंप में खड़ा कर लोडर चलान ​काट कर लोडरों के द्वारा 12 चक्का ट्रक से 2,700सौ रुपये प्रति वाहन एवं ​14 चक्का ट्रक से 3,000हज़ार रुपये प्रति वाहन तथा ​16 चक्का ट्रक वाहनों से 4,000 हज़ार रुपये प्रति वाहन एंव ​हाइवा वाहनो से 100रुपये प्रति टन की दर से सीधी वसूली की जा रही है। इस गतिविधियों में वाइट नेताओं के साथ कई असामाजिक तत्वों के लोग शामिल हैं। ​चर्चा है कि खनन कार्य में लगी उत्खनन कंपनी कर रही शुशी इंफ्रा के कोल स्टॉक और परिवहन व्यवस्था की आड़ में यह पूरा गिरोह बेखौफ होकर फल-फूल रहा है। फर्जी अध्यक्ष और सचिव बनकर घूम रहे इन असामाजिक तत्वों का ‘टेरर मॉडल’ इतना हावी है कि बिना इस अवैध वसूली को चुकाए किसी भी वाहन का परिचालन लगभग असंभव कर दिया गया है। ​इस पूरे फर्जीवाड़े और गैर-कानूनी वसूली पर तत्काल रोक लगाने के लिए स्थानीय प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने आम्रपाली-चंद्रगुप्त क्षेत्र को लिखित आवेदन सौंपा है। ​आवेदन की प्रतिलिपि परियोजना पदाधिकारी चंद्रगुप्त तथा प्रबंध निदेशक शुशी इंफ्रा को भी प्रेषित की गई है। मांग की गई है कि ​इस पूरे गिरोह और फर्जी समिति के जाल की निष्पक्ष व त्वरित उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ​अवैध वसूली में लिप्त सभी असामाजिक तत्वों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। ​अब देखने वाली बात यह होगी कि सीसीएल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस प्रशासन इस संगठित अवैध वसूली तंत्र पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है या असामाजिक तत्व यूं ही बेखौफ होकर सरकारी व निजी संपत्ति को चूना लगाते रहेंगे।

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