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झारखंड में मनरेगा ही रहेगा, वीबी जी राम जी के खिलाफ संकल्प पारित

झारखंड में मनरेगा ही रहेगा, वीबी जी राम जी के खिलाफ संकल्प पारित

-केंद्र को भेजेगी सरकार, मंत्री दीपिका ने बतायी वजह
रांची।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण, 2025 यानी वीबी जी राम जी लाये जाने के खिलाफ झारखंड विधानसभा में एक संकल्प पारित किया गया। इसे केंद्र सरकार को भेजा जायेगा। इस संकल्प को झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने लाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अधिनियम झारखंड सरकार के साथ साथ यहां की ग्रामीण जरुरतों के लिहाज से सही नहीं है. उनके प्रस्ताव पर स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने गैर सरकारी संकल्प की प्रक्रिया शुरू करने से ठीक पहले वोटिंग कराई जो ध्वनिमत से पारित हो गयी।

गरीबों के अधिकारों के हनन की आशंका:
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने वीबी जी राम जी के खिलाफ प्रस्ताव लाने की वजह बतायी। उन्होंने कहा कि डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए-1 सरकार ने वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को लागू किया था। झारखंड के लिए यह योजना यहां के ग्रामीण परिवारों के लिए जीवन रेखा है। इस योजना ने गरीबी कम करने, पलायन रोकने और महिलाओं के सशक्तिकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभायी है। हाल ही में प्रस्तावित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन अधिनियम, 2025 वीबी ग्राम जी के प्रावधानों से ग्रामीण गरीबों के अधिकारों के हनन की आशंका है। प्रस्तावित अधिनियम काम मांगने की गारंटी को समाप्त करता है।

झारखंड सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ:
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि वर्तमान में मनरेगा के तहत अकुशल मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती है। नये अधिनियम में केंद्र और राज्य वित्तीय पोषण अनुपात को 60:40 करना संघीय ढांचे के खिलाफ है जो झारखंड जैसे सीमित संसाधनों वाले राज्य पर असहनीय वित्तीय बोझ डालेगा। केंद्र सरकार को पूर्ववत वित्त पोषण जारी रखना चाहिये।

मंत्री ने बतायी वीबी जी राम जी की खामियां:
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि वीबी जी राम जी की वजह से ग्राम सभाओं की शक्तियों का संरक्षण भी प्रभावित हो रहा है। 2005 के अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों, ग्राम सभाओं, पेसा और अनुसूचित क्षेत्र को अपनी स्थानीय जरुरत के अनुसार 266 कार्य जैसे जल संरक्षण, भूमि विकास चुनने की स्वतंत्रता थी। लेकिन नये प्रावधान से डिजिटल बाधाएं आने की भी आशंका है। उन्होंने कहा कि तकनीकि जटिलताओं की वजह से भुगतान में देरी होगी। इसलिए वीबी ग्राम जी इसके अनुरुप नहीं है।

जॉब कार्ड धारक परिवारों के लिए मनरेगा जरूरी
मंत्री ने प्रस्ताव किया कि मनरेगा योजना की मांग आधारित, अधिकार आधारित और पूरी तरह से केंद्र प्रायोजित ढांचे को बनाए रखा जाये। झारखंड के लाखों जॉब कार्ड परिवार धारकों के हित की रक्षा के लिए वर्ष 2005 के मूल अधिनियम के प्रावधानों से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जायी। साथ ही मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 150 दिन किया जाये, ताकि ग्रामीणों को अपने ही गांव में अधिक दिन तक रोजगार मुहैया कराकर पलायन को रोका जा सके।

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