रांची। झारखंड में पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) में बाघों के संरक्षण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। अदालत ने बाघों के संरक्षण से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा और रिजर्व में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा।
बाघों के संरक्षण को लेकर दायर हुई जनहित याचिका
यह मामला विकास महतो की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने का मुद्दा उठाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान वन विभाग के अधिकारियों से संरक्षण संबंधी कार्यों की जानकारी मांगी।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) द्वारा हलफनामा दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी ने पूर्व के न्यायालयी आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया है। इसके बाद अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
बाघों के प्राकृतिक आवास को बचाने पर जोर
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पलामू टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी कहा कि रिजर्व के आसपास से गुजरने वाली रेलवे लाइन और जंगल से होकर जाने वाली सड़कों को स्थानांतरित करने की जरूरत पर विचार किया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा की जा सके।
देश के शुरुआती टाइगर रिजर्व में शामिल है पलामू
पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड के लातेहार जिले में स्थित है और देश के शुरुआती नौ टाइगर रिजर्व में शामिल रहा है। इसकी स्थापना प्रोजेक्ट टाइगर के शुरुआती दौर में हुई थी। यह क्षेत्र जैव विविधता, साल के जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए महत्वपूर्ण है।
संरक्षण के लिए जवाबदेही पर अदालत का जोर
हाईकोर्ट की सुनवाई से स्पष्ट है कि बाघों के संरक्षण, जंगलों की सुरक्षा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को बचाने के मामले में विभागीय जवाबदेही महत्वपूर्ण है। अब मामले में वन विभाग की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट और संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी।
